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प्रेम विवाह

डा. कामिनी साहिर   हमारे यहां मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा गया है, विदेशी भाषा में इसका रूपान्तर सामाजिक पशु है। दोनों मनुष्य की परिभाषा  हेतु पर्यायवाची शब्द हैं परन्तु विदेशी शब्द यथार्थ के अधिक निकट है, उसमें वास्तविकता और विवशता का सतर्क समन्वय है – पशुता प्राकृतिक है और सामाजिकता बुद्धिजन्य, परिस्थितिगत विवशता। हमारे शब्द में वास्तविकता अनावृत नहीं है,

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जरा सोचिए 

पिछले दशक में हरियाणा प्रेम-विवाह करने वाले नवयुवक-नवयुवतियों की उनके परिजनों द्वारा हत्या के लिए खासा बदनाम हुआ। इस तरह का माहोल बनाने में काफी बड़ी भूमिका समाज के ठेकेदारों-खाप पंचायतियों की भी रही।

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