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साहित्य का उद्देश्य -प्रेमचंद

Post Views: 15,102 साहित्य -चिंतन 1936 में प्रगतिशील लेखक संघ  के प्रथम अधिवेशन लखनऊ में प्रेमचंद द्वारा दिया गया अध्यक्षीय भाषण। यह सम्मेलन हमारे साहित्य के इतिहास में स्मरणीय घटना…

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जीवन में साहित्य का स्थान -प्रेमचंद

Post Views: 2,984 साहित्य-चिंतन        साहित्य का आधार जीवन है। इसी नींव पर साहित्य की दीवार खड़ी होती है। उसकी अटरियाँ, मीनार और गुम्बद बनते हैं लेकिन बुनियाद…

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मेरी पहली रचना -प्रेमचंद

Post Views: 288 उस वक्त मेरी उम्र कोई 13 साल की रही होगी। हिन्दी बिल्कुल न जानता था। उर्दू के उपन्यास पढऩे-लिखने का उन्माद था। मौलाना शहर, पं. रतननाथ सरशार,…

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इंद्रनाथ मदान को पत्र -प्रेमचंद

Post Views: 1,153 प्रेमचंद अपनी नज़र मेेंं (कोई रचनाकार-कलाकार स्वयं को कैसे देखता है। यह जानना कम दिलचस्प नहीं होता। यह भी सही है कि किसी लेखक को सिर्फ उसके…

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प्रेमचंद से दोस्ती- विकास नारायण राय

Post Views: 684 आलेख महान लेखक प्रेमचंद के साहित्य से हर कोई परिचित है। उनके साहित्य में तत्कालीन सामाजिकशक्तियों की टकराहट-संघर्ष-आंदोलन स्पष्टत: मौजूद हैं। विकास नारायण राय का प्रस्तुत विशेष…

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गोदान के होरी का समसामयिक संदर्भ – आदित्य आंगिरस

Post Views: 1,089 आलोचना गोदान प्रेमचंद का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें उनकी कला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची है। गोदान में भारतीय किसान का संपूर्ण जीवन – उसकी आकांक्षा और…