जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

Post Views: 801 एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा…

placeholder

वर्तमान समय की दुरभिसंधि की करुण कथा – जाट कहवै , सुण जाटनी- राजेन्द्र गौतम

Post Views: 461 ग्लोकल और लोकल की फ्रेज इस उपन्यास के साथ विशेष रूप से जुडी है क्योंकि इसमें चित्रित समस्या का आकार अखिल भारतीय है पर उसको जिस भाषिक…

placeholder

कृषि संकट को समझने के लिए – दो जरूरी किताबें – प्रवीन कुमार

Post Views: 314 भारत के किसान लम्बे समय से एक भयावह और जानलेवा कृषि संकट की गिरफ्त में है। बड़े फार्मर और धनी किसान भले ही इस संकट से ज्यादा…

हिंदी दलित साहित्य – 2018

Post Views: 793 बजरंग बिहारी तिवारी हिंदी दलित साहित्य : 2018      अन्य भारतीय भाषाओँ की तुलना में हिंदी दलित साहित्य इस मायने में भिन्न है कि यहाँ रचनाकारों की…

placeholder

दाराशिकोह और उनका समुद्र संगम -राधावल्लभ त्रिपाठी

Post Views: 1,216 राधावल्लभ त्रिपाठी बादशाह शाहजहां के चार बेटों में दाराशिकोह सबसे बड़े थे। वे शाहजहां के सबसे छोटे बेटे औरंगजेब के द्वारा मारे गए। अगर औरंगजेब की जगह…

placeholder

घर की सांकल – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 366 बजरंग बिहारी तिवारी (हरपाल के कविता संग्रह घर की सांकल की समीक्षा) कविता जीवन की सृजनात्मक पुनर्रचना है। इस सृजन में यथार्थ, कल्पना, आकांक्षा, आशंका और संघर्ष के…

placeholder

पारिस्थितिक संकट और समाजवाद का भविष्य – डा. कृष्ण कुमार

Post Views: 726 पठनीय पुस्तक ‘यह पृथ्वी मेरी और सब की है और यह हमारे अस्तित्व की पहली शर्त है। इस पृथ्वी को मोल तोल की एक वस्तु के रूप…

किताबें ज्ञान का प्रवेश द्वार हैं – परमानंद शास्त्री

Post Views: 691 परिचर्चा किसी व्यक्ति व समाज की बेहतरी में पुस्तकोंं की भूमिका निर्विवाद है, लेकिन पुस्तक पठन-अध्ययन-मनन की संस्कृति पर मंडराते खतरे की चिंता निरंतर यत्र-तत्र सुनने में…

placeholder

दलित साहित्य: एक अन्तर्यात्रा – कमलानंद झा

Post Views: 372 पठनीय पुस्तक दलित साहित्य के लिए यह शुभ संकेत है कि अब हिंदी में भी लगातार आलोचनात्मक पुस्तकें प्रकाशित हो रहीं हैं। रचना के साथ-साथ आलोचना का…