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खेती का इतिहास – गोपाल प्रधान

Post Views: 11 पठनीय पुस्तक 2020 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास यानी नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित सुषमा नैथानी की किताब ‘अन्न कहाँ से आता है’ सही अर्थ में हिंदी की…

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पीठासीन अधिकारीः बेहतरीन कहानियों का गुलदस्ता- अरुण कुमार कैहरबा

Post Views: 33 हरियाणा के जिला यमुनानगर के जाने-माने कथाकार ब्रह्म दत्त शर्मा का तीसरा कहानी संग्रह ‘पीठासीन अधिकारी’ बीते वर्ष के आखिरी चरण में के.एल. पचौरी प्रकाशन, गाजियाबाद से…

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कब तक मारे जाओगे- डॉ . पूनम तुषामड़

हिन्दी साहित्य में दलित साहित्य की प्रतिनिधि डॉ. पूनम तुषामड़ का जन्म दिल्ली में एक निम्न आयवर्गीय परिवार में हुआ।दलित कविता की नई पीढ़ी के जिन रचनाकारों ने समकालीन साहित्य को प्रभावित किया है, उनमें डॉ. तुषामड़ का नाम उल्लेखनीय है। उनकी रचनाओं को हिन्दी जगह में व्यापक स्तर पर सराहा गया है। हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा चयनित काव्य संग्रह “माँ मुझे मत दो” से उन्हें विशेष ख्याति मिली। उनकी कविताओं में नए संदर्भों के साथ दलित चेतना का विकसित रूप अपनी विशिष्टता के साथ अभिव्यक्त हुआ है। “राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन” द्वारा सम्मानित एवं “सम्यक प्रकाशन” द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह “मेले में लड़की’ने भी पाठकों को खासा प्रभावित किया। वर्ष 2004 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली का नवोदित लेखक पुरस्कार उनके कविता संग्रह “माँ मुझे मत दो” के लिए तथा 2010 में हिन्दी कविता कोश सम्मान-2010 व ”हम साथ-साथ हैं पत्रिका” द्वारा प्राप्त युवा रचनाकार सम्मान आदि शामिल हैं।

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शानदार तोहफा – जोतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और डा. भीम राव अम्बेडकर की संपूर्ण रचनाएं – सत्यशोधक फाऊंडेशन

Post Views: 822 पीडीएफ फार्मेट में पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें जोतिबा फुले की संपूर्ण रचनाएं जोतिबा फुले संपूर्ण रचनावली जोतिबा फुले जीवनी – एन.सी.आर.टी.ई. गुलामगिरी –…

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11 अप्रैल जोतिबा फुले 14 अप्रैल बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की जंयति पर सभी पाठकों को बधाई

Post Views: 410 सत्यशोधक फाऊंडेशन के सहयोग से देस हरियाणा पत्रिका बाबा साहेब व जोतिबा फुले जी की जयंति पर अपने पाठकों को समर्पित करती है डा. भीमराव अम्बेडकर की…

जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

Post Views: 791 एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा…

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वर्तमान समय की दुरभिसंधि की करुण कथा – जाट कहवै , सुण जाटनी- राजेन्द्र गौतम

Post Views: 461 ग्लोकल और लोकल की फ्रेज इस उपन्यास के साथ विशेष रूप से जुडी है क्योंकि इसमें चित्रित समस्या का आकार अखिल भारतीय है पर उसको जिस भाषिक…