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पानीपत थर्मल प्लांट का पास-परिवेश

आशु वर्मा/अंशु मालवीय पानीपत थर्मल प्लांट के सामने से गुजरते समय अक्सर दैत्याकार चिमनियां और उनसे निकलता धुआं, दूर तक फैली राख की पहाड़ियां और बंजर खेत, धूल और फैली राख से अटी बस्तियां, गर्द से सने पेड़, उदास और बेरौनक दुकानें ध्यान खींचती थी। जवाहर लाल नेहरू ने जिन बड़े सार्वजनिक प्रतिष्ठानों को आधुनिक युग के मंदिर और ‘कमांडिंग

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