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देवदारु – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 5 निष्टजनानुमोदित ‘सज्जा’ को ‘छाया’ नाम दिया था वह जरूर इस पेड़ की शोभा से प्रभावित हुआ था। पेड़ क्या है, किसी सुलझे हुए कवि के चित्त का…

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कुटज – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 6 कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्या! पूर्व और अपर समुद्र-महोदधि और रत्नाकर-दोनों का दोनों भुजाओं से थाहता हुआ हिमालय ‘पृथ्वी…

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घर जोड़ने की माया – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 4 सन् 1942-43 ई. में मैंने कबीरदास के सम्बंध में एक पुस्तक लिखी पुस्तक लिखने की तैयारी दो-ढाई साल से कर रहा था और नाना प्रकार के प्रश्न…

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दो बैलों की कथा – प्रेमचंद

Post Views: 4 जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता है। हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं, तो उसे गधा कहते हैं। गधा…

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अशोक के फूल – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 7 अशोक के फिर फूल आ गए हैं। इन छोटे-छोटे, लाल-लाल पुष्पों के मनोहर स्तबकों में कैसा मोहन भाव है! बहुत सोच-समझकर कंदर्प देवता ने लाखों मनोहर पुष्पों…

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आपने मेरी रचना पढ़ी? – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 4 हमारे साहित्यिकों की भारी विशेषता यह है कि जिसे देखो वहीं गम्भीर बना है, गम्भीर तत्ववाद पर बहस कर रहा है और जो कुछ भी वह लिखता…

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अद्भुत अपूर्व स्वप्न – भारतेंदु हरिश्चद्र

Post Views: 6 आज रात्रि को पर्यंक पर जाते ही अचानक आँख लग गई। सोते में सोचता क्‍या हूँ कि इस चलायमान शरीर का कुछ ठीक नहीं। इस संसार में…

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शिरीष के फूल – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 9 जहाँ बैठकर यह लेख लिख रहा हूँ उसके आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ, शिरीष के अनेक पेड़ हैं | जेठ की जलती धूप में, जबकि धरित्री निर्धन अग्निकुंड बनी हुई…