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न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 158 महावीर ‘दुखी’  न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता, रहा हूं मैं हमेशा आम इन्सानों से वाबस्ता। सुना है देवाओं का कभी था बास धरती पर,

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