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शिरीष के फूल – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 12 जहाँ बैठकर यह लेख लिख रहा हूँ उसके आगे-पीछे, दाएँ-बाएँ, शिरीष के अनेक पेड़ हैं | जेठ की जलती धूप में, जबकि धरित्री निर्धन अग्निकुंड बनी हुई…

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सच्ची वीरता – सरदार पूर्ण सिंह

Post Views: 61 सरदार पूर्ण सिंह जी (1881 से 1931) का जन्म वर्तमान पाकिस्तान के ज़िला एबटाबाद के गांव सिलहड़ में हुआ था । हाईस्कूल रावलपिंडी से उत्तीर्ण की और…

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मानसिक पराधीनता – प्रेमचंद

Post Views: 12 हम दैहिक पराधीनता से मुक्त होना तो चाहते हैं, पर मानसिक पराधीनता में अपने-आपको स्वेच्छा से जकड़ते जा रहे हैं। किसी राष्ट्र या जाति का सबसे बहुमूल्य…

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महाभारत के समय का भारत – बालकृष्ण भट्ट

Post Views: 17 महाराज रामचंद्र के समय से जब हम धर्मराज युधिष्ठिर के समय को मिलाते हैं तो देश की हर एक बातों में बड़ा अंतर पाते हैं। यद्यपि युधिष्ठिर…

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यथास्मै रोचते विश्वम् – रामविलास शर्मा

Post Views: 18 प्रजापति से कवि की तुलना करते हुए किसी ने बहुत ठीक लिखा था- “यथास्मै रोचते विश्वं तथेद परिवर्तते।” कवि को जैसे रुचता है वैसे ही संसार को…

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अंध विश्वास – प्रेमचंद

Post Views: 19 हिन्दू-समाज में पुजने के लिए केवल लंगोट बांध लेने और देह में राख मल लेने की जरूरत है; अगर गांजा और चरस उड़ाने का अभ्यास भी हो…

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प्रेमचन्द का महत्व – आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

Post Views: 19 डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी आधुनिक हिन्दी साहित्य के गंभीर अन्वेषक और मौलिक चिंतक हैं। आपकी रचनाओं में पांडित्य और सरसता का सुन्दर सामंजस्य पाया जाता है। बाणभट्ट की…

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निंदा-रस – हरिशंकर परसाई

Post Views: 15 निंदा कुछ लोगों की पूंजी होती है। बड़ा लंबा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूंजी से। कई लोगों की ‘रिस्पेक्टेबिलिटी’ (प्रतिष्ठा) ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण…

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गेहूंं और गुलाब – रामवृक्ष बेनीपुरी

Post Views: 23 लेखक- रामवृक्ष बेनीपुरी का जन्म 23 दिसंबर, 1899 को बेनीपुर, मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुआ था। वे स्वाधीनता सेनानी के रूप में लगभग नौ साल जेल में रहे।…