Tag: निबंध

शिवमूर्ति – प्रतापनारायण मिश्र

Post Views: 15 हमारे ग्राम-देव भगवान् भूतनाथ से अकथ्य अप्रतर्क्स एवं अचिंत्य हैं। तो भी उनके भक्तजन अपनी रुचि के अनुसार उनका रूप, गुण, स्वभाव कल्पित कर लेते हैं। उनकी

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एक शांत नास्तिक संत प्रेमचंद : जैनेंद्र कुमार

Post Views: 61 संस्मरण मुझे एक अफसोस है, वह अफसोस यह है कि मैं उन्हें पूरे अर्थों में शहीद क्यों नहीं कह पाता हूँ, मरते सभी हैं, यहां बचना किसको

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हिन्दी कहानी का भविष्य – डॉ. नामवर सिंह

कहानी के भविष्य की चिंता राजेन्द्र यादव को भी है और मुझे भी। लेकिन जैसा कि लेव तोल्सतोय ने अन्ना करेनिना के आरंभ में कहा है, सभी सुखी परिवार एक जैसे हैं लेकिन हर दुखी परिवार अपने-अपने ढंग से दुखी है। … Continue readingहिन्दी कहानी का भविष्य – डॉ. नामवर सिंह

भारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

सम्मान का भाव रामविलास जी के प्रति हममें से प्रत्येक के मन में है, पर कहीं-न-कहीं उनकी व्याख्या के प्रति गंभीर संदेश भी है। मसलन सुधीरचन्द्र को भारतेन्दु में सर्वत्र एक प्रकार का दुचित्तापन दिखाई पड़ता है: राजभक्ति और देशभक्ति को लेकर भी, हिंदू-मुस्लिम भेदभाव के सवाल पर भी, यहां तक कि’ स्वदेशी’ के मामले में भी उनके आचार-विचार में फांक दिखती है। … Continue readingभारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

राष्ट्र का स्वरूप – वासुदेव शरण अग्रवाल

Post Views: 2,288 भूमि, भूमि पर बसने वाला जन और जन की संस्कृति इन तीनों के सम्मिलन से राष्ट्र का स्वरूप बनता है। भूमि का निर्माण देवों ने किया है,

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नेता नहीं, नागरिक चाहिए – रामधारी सिंह दिनकर

नेता का पद आराम की जगह है, इससे बढ़कर दूसरा भ्रम भी नहीं हो सकता। अंग्रेजी में एक कहावत है कि किरीट पहननेवाला मस्तक बराबर चक्कर में रहता है। तब जो आदमी मेहनत और धीरज से भागता है, उससे यह कैसे उम्मीद की जाए की वह आठ पहर के इस चक्कर को बर्दाश्त करेगा और जिनमें धीरज नहीं, सबसे अधिक वे ही इस चक्कर को अपने माथे पर लेने को क्यों बेकरार हैं? दुनिया के सामने संगठनों से निकली हुई तैयार चीजें ही आती हैं, नेताओं के हस्ताक्षरों से भूषित कागज के पुर्जे नहीं। और कागज के इन निर्जीव पुों को लेकर दुनिया करेगी भी क्या? … Continue readingनेता नहीं, नागरिक चाहिए – रामधारी सिंह दिनकर

भीष्म को क्षमा नहीं किया गया – हजारी प्रसाद द्विवेदी

किस प्रकार पुराने इतिहास से वह वर्तमान समस्‍या के सही स्‍वरूप का उद्घाटन करते हैं और उसका विकासक्रम समझा देते है, वह चकित कर देता है। हर प्रश्‍न के तह में जाने की उनकी पद्धति आधुनिक युग में भी उपयोगी है। … Continue readingभीष्म को क्षमा नहीं किया गया – हजारी प्रसाद द्विवेदी

क्रोध – रामचन्द्र शुक्ल  

Post Views: 288 क्रोध दु:ख के चेतन कारण से साक्षात्कार या अनुमन से उत्पन्न होता है। साक्षात्कार के समय दु:ख और उसके कारण के संबंध का परिज्ञान आवश्यक है। तीन

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निराला

निराला : रचना सौष्ठव

इस दृश्य के अनुरूप रचना कल्याणकारिणी होनी चाहिए। फूलों की अनेक सुगन्धों की तरह कल्याण के भी रूप हैं। साहित्यिक को यहाँ देश और काल का उत्तम निरूपण कर लेना चाहिए। समष्टि की एक माँग होती है। वह एक समूह की माँग से बड़ी है। साहित्यिक यदि किसी समूह के अनुसार चलता है, तो वह उच्चता नहीं प्राप्त कर सकता, जो समष्टि को लेकर चलता है। … Continue readingनिराला : रचना सौष्ठव

एक कुत्ता और एक मैना- हजारी प्रसाद द्विवेदी

एक दिन वह मैना उड़ गई। सायंकाल कवि ने उसे नहीं देखा। जब वह अकेले आया करती है उस डाल के कोने में; जब झींगुर अन्धकार में झनकारता रहता है, जब हवा में बाँस के पत्ते झरझराते रहते हैं, पेड़ों की फाँक से पुकारा करता है नींद तोड़नेवाला सन्ध्यातारा! कितना करुण है, उसका गायब हो जाना! (लेख से) … Continue readingएक कुत्ता और एक मैना- हजारी प्रसाद द्विवेदी