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भारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

सम्मान का भाव रामविलास जी के प्रति हममें से प्रत्येक के मन में है, पर कहीं-न-कहीं उनकी व्याख्या के प्रति गंभीर संदेश भी है। मसलन सुधीरचन्द्र को भारतेन्दु में सर्वत्र एक प्रकार का दुचित्तापन दिखाई पड़ता है: राजभक्ति और देशभक्ति को लेकर भी, हिंदू-मुस्लिम भेदभाव के सवाल पर भी, यहां तक कि’ स्वदेशी’ के मामले में भी उनके आचार-विचार में फांक दिखती है। … Continue readingभारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ- नामवर सिंह

इन पोथियों का मूल्य उन पर लिखी कीमत में नहीं, दुकानदार की आँखों में नहीं, मेरी डिग्रियों में नहीं, अध्यापक के वेतन में नहीं। उस कोटि-कोटि जनता के हृदय में है, उसकी आँखों में है, उसके हाथों में है। (लेख से ) … Continue readingपोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ- नामवर सिंह

नामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र

नामवर सिंह ने जब हिन्दी समीक्षा में पदार्पण किया तो वह समय न केवल हिन्दी रचना व आलोचना के लिए महत्त्वपूर्ण था, बल्कि दर्शन व साहित्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया में गर्मागर्म बहस छिड़ी हुई थी। नामवर सिंह को उस परम्परा में भी संघर्ष करना पड़ा, जिसको वे आगे बढ़ाना चाहते थे और इसके विरोधियों से तो टक्कर लेने के लिए वे मैदान में उतरे ही थे। (लेख से ) … Continue readingनामवर सिंह : हिंदी आलोचना के ‘मेहतर’- प्रो. सुभाष चन्द्र

संस्कृति और सौन्दर्य- नामवर सिंह

नामवर सिंह आधुनिक हिंदी आलोचना के आधार स्तम्भ माने जाते हैं. उन्होंने आलोचना के परम्परागत मानदंडों से हटकर एक नवीन दृष्टि से साहित्य को परखा है. संस्कृति और सौन्दर्य नामक अपने लेख में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को संदर्भित करते हुए भारतीय संस्कृति की सामासिकता को स्पष्ट करते हैं. इसके साथ साथ वह कला में सुंदर क्या है? इस पर भी विस्तृत विमर्श प्रस्तुत करते हैं. … Continue readingसंस्कृति और सौन्दर्य- नामवर सिंह

नामवर सिंह : हिन्दी आलोचना के डिक्टेटर – डॉ. अमरनाथ

“हिंदी के आलोचक” शृंखला में कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अमरनाथ ने 50 से अधिक हिंदी-आलोचकों के अवदान को रेखांकित करते हुए उनकी आलोचना दृष्टि के विशिष्ट बिंदुओं को उद्घाटित किया है। इन आलोचकों पर यह अद्भुत सामग्री यहां प्रस्तुत है। इस शृंखला को आप यहां पढ़ सकते हैं। … Continue readingनामवर सिंह : हिन्दी आलोचना के डिक्टेटर – डॉ. अमरनाथ

हिंदी-साहित्य के इतिहास पर पुनर्विचार – नामवर सिंह

इतिहास लिखने की ओर कोई जाति तभी प्रवृत्त होती है जब उसका ध्‍यान अपने इतिहास के निर्माण की ओर जाता है। यह बात साहित्‍य के बारे में उतनी ही सच है जितनी जीवन के। … Continue readingहिंदी-साहित्य के इतिहास पर पुनर्विचार – नामवर सिंह