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हरिजन गाथा – नागार्जुन

Post Views: 79 कविता (1) ऐसा तो कभी नहीं हुआ था !महसूस करने लगीं वेएक अनोखी बेचैनीएक अपूर्व आकुलताउनकी गर्भकुक्षियों के अन्दरबार-बार उठने लगी टीसेंलगाने लगे दौड़ उनके भ्रूणअंदर ही अंदरऐसा…

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प्रतिबद्ध हूँ, संबद्ध हूँ, आबद्ध हूँ – नागार्जुन

Post Views: 16 कविता प्रतिबद्ध हूँसंबद्ध हूँआबद्ध हूँ प्रतिबद्ध हूँ, जी हाँ, प्रतिबद्ध हूँ –बहुजन समाज की अनुपल प्रगति के निमित्त –संकुचित ‘स्व’ की आपाधापी के निषेधार्थ…अविवेकी भीड़ की ‘भेड़या-धसान’…

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कालिदास – नागार्जुन

Post Views: 18 कविता कालिदास! सच-सच बतलानाइन्दुमती के मृत्युशोक सेअज रोया या तुम रोये थे?कालिदास! सच-सच बतलाना! शिवजी की तीसरी आँख सेनिकली हुई महाज्वाला मेंघृत-मिश्रित सूखी समिधा-समकामदेव जब भस्म हो…

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बादल को घिरते देखा है – नागार्जुन

Post Views: 11 अमल धवल गिरि के शिखरों पर,बादल को घिरते देखा है।छोटे-छोटे मोती जैसेउसके शीतल तुहिन कणों को,मानसरोवर के उन स्वर्णिमकमलों पर गिरते देखा है,बादल को घिरते देखा है।…

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अकाल और उसके बाद – नागार्जुन

Post Views: 52 कविता कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदासकई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पासकई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्तकई दिनों तक चूहों…

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सामंती व्यवस्था से टकराता साहित्यकार – बी. मदन मोहन

तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 9 फरवरी 2019 को ‘लेखक से संवाद’ सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें हिमाचल के प्रख्यात साहित्यकार एस.आर. हरनोट के साथ श्रोताओं ने संवाद करना था, लेकिन स्वास्थ्य के चलते वे पहुंच नहीं पाए। एम एल एन कालेज, यमुनानगर में हिंदी के एसोसिएट प्रोफेसर बी.मदनमोहन ने उनकी रचनाओं से परिचित करवाया और उनकी रचनाओं के सामाजिक सरोकारों व सौंदर्य-शिल्प पर चर्चा की। प्रस्तुत है विकास साल्याण की रिपोर्ट –

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जनवादी कविता की विरासत-डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 2,108 हिन्दी में आठवें दशक के दौरान जनवादी कविता का स्वर ही प्रमुख रहा है, कई नए हस्ताक्षर इधर जनवादी कविता के क्षेत्र में उभर कर आए हैं,…