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धुनकर-बुनकर

डा. श्रेणिक बिम्बिसार तुक-तुक तांय-तांय शब्दों को रूई सा धुनें आओ कविता बुनें चौपाईयों सी लय थाप हो गज़ल के काफिए सी दोहों की सुगमता में भर जाए कबीर सी…