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धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप -कर्मचन्द ‘केसर’

Post Views: 153   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल कलजुग के पहरे म्हं देक्खो, धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप। समझण आला ए समझैगा, तीरथाँ तै बदध सैं माँ बाप। सारे चीब लिकड़ज्याँ…