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इसाए जी हो गरीब्बां जो अन्न पाणी वो दास – धनपत सिंह

Post Views: 309 इसाए जी हो गरीब्बां जो अन्न पाणी वो दासइसीए हो सै भूख जयसिंह इसी ए होया कर प्यास सांप के पिलाणे तैं भाई बणै दूध का जहरप्यार…

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हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा – धनपत सिंह

Post Views: 281 हे तूं बालम के घर जाइये चंद्रमा,जाइये चंद्रमा और के चाहिये चंद्रमा आज सखीयां तैं चाली पट, दो बात सुणैं नैं म्हारी डटघूंघट तणना मुश्किल, बोहड़ीया बणना…

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कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक ले – धनपत सिंह

Post Views: 361 कलम घिसे और दवात सुकज्या हरफ लिखणियां थक लेरै मेरी इसी पढ़ाई नैं कौण लिखणियां लिख ले इतणै भूक्खा मरणा हो इतणै वा झाल मिलै नागुमसुम रहैगा…

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मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवार – धनपत सिंह

Post Views: 475 मात, पिता और भाई, ब्याही, सब नकली परिवारदुनियां के म्हं बड़ा बताया पगड़ी बदला यार किरसन और सुदामा यारी लाए सुणे होंएक ब्राह्मण और एक हीर कै…

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हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैं – धनपत सिंह

Post Views: 371 हळ जोतै खेत कमावै जगपालन जमीदार हो सैंचाक घुमावै बास्सण तारै वोहे लोग कुम्हार हो सैं क्यूं लागी मनैं विसवासण, हम घड़ते माट्टी के बास्सणतांबे और पीतळ…

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पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशी – धनपत सिंह

Post Views: 327 पाक है मोहब्बत म्हारी ना हे बदमाशीहीरामल तैं पहल्यां मनैं टुटणा है फांसी पाक मोहब्बत दुनियां के म्हं सबतैं बड़ी करारी हो सैफेर जी के लेणा हो…

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मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सास – धनपत सिंह

Post Views: 316 मेरा जोबन, तन, मन बिघन करै, कुछ जतन बणा मेरी सासदिन रैन चैन नहीं पिया बिना, छ: ऋत बारहा मास चैत चाहता चित चोर को चले गए…

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तुम जाओ सुसरा सास – धनपत सिंह

Post Views: 212 तुम जाओ सुसरा सास,समझा ल्यूंगी जब आज्यागा मेरे पास मेरे बुझे ताझे बिना कित भरतार जावैगामेरा वो गुनाहगार क्यूकर तजकै नार जावैगाधमका द्यूंगी करड़ी हो कै क्यूकर…