Tag: देस हरियाणा

महात्मा गांधी – रविन्द्र नाथ टैगोर

Post Views: 22 भारतवर्ष की अपनी एक सम्पूर्ण भौगोलिक प्रतिभा है। पूर्व-प्रान्त से लेकर पश्चिम- प्रान्त तक, उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक भारत की जो एक

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भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ – शैलेन्द्र सिंह

Post Views: 52 भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ,आज़ादी के दर्पण की मैं धूल हटाने निकला हूँ।शत-शत कोटिक नमन लेखनी भगत सिंह की करनी को,ऐसा बालक जनने

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देवताओं के विरुद्ध कविता – योगेश

Post Views: 127 कविता,क्या तुम नहीं जानती कि मैं कभी तुमसे अलग नहीं हो सकता? क्या मैं अपने अंतर में जन्म लेने वाली सभी खुशियों, सभी आंसुओं से अलग हो

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बुद्ध की कहानी और शिक्षा – जवाहर लाल नेहरु

Post Views: 32 बुद्ध की कहानी बुद्ध की कहानी ने मुझे बचपन में ही आकर्षित किया था और मैं युवा सिद्धार्थ की तरफ खिंचा था, जिसने बहुत-से अन्तद्वंद्वों, दुःख और

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स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से सराबोर बाल उपन्यासिका – अरुण कैहरबा

Post Views: 30 पुस्तक समीक्षापुस्तक : जीतेंगे हमलेखक : साबिर हुसैनप्रकाशक : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारतपृष्ठ-56मूल्य : रु. 90. स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से सराबोर बाल उपन्यासिकाकिताब पाठकों में पैदा कर

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जैसा भोजन वैसे मनुष्य का दर्शन – मुद्राराक्षस

Post Views: 58 उन्नीसवीं सदी के समाज विचारक और दार्शनिक लुडविग फायर बाख ने मनुष्य की सामाजिक ऐतिहासिक भूमिका पर विचार करते हुए एक बहुत दिलचस्प बात की थी- मनुष्य

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लघुकथाएँ – खलील जिब्रान

Post Views: 27 1. इंसाफ़ एक रात शाही महल में एक भोज हुआ। इस मौके पर एक आदमी आया और उसने शहजादे के सामने नमन किया। सभी मेहमान उसकी तरफ़

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हिन्दुस्तानी संस्कृति का अटूट सिलसिला – जवाहर लाल नेहरु

Post Views: 23 इस तरह शुरू-शुरू के दिनों में हम एक ऐसी सभ्यता और संस्कृति का आरम्भ देखते हैं, जो बाद के युगों में बहुत फली-फूली और पनपी और बावजूद

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मध्यकालीन कविता में सांस्कृतिक समन्वय – प्रो. सुभाष चन्द्र

Post Views: 60 संस्कृति जड़ वस्तु नहीं होती और न यह स्थिर रहती है, बल्कि यह हमेशा परिवर्तनशील है। संस्कृतियों के मिलन से नए बदलाव होते हैं, जिससे किसी देश या समुदाय

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गज़लें – मेहरू

Post Views: 77 “उजाले हर तरफ होंगे” ग़ज़ल संग्रह के रूप में देसहरियाणा ने मनजीत भोला की प्रगतीशील मूल्यों की रचनाएं प्रकाशित की थी। उन ग़ज़लों को प्रदेश और प्रदेश

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