Tag Archives: देस हरियाणा

जंगली कौन

विनोद सिल्ला कितना भाग्यशाली था आदिमानव तब न कोई अगड़ा था न कोई पिछड़ा था हिन्दू-मुसलमान का न कोई झगड़ा था छूत-अछूत का न कोई मसला था अभावग्रस्त जीवन चाहे लाख मजबूर था पर धरने-प्रदर्शनों से कोसों दूर था कन्या भ्रूण-हत्या का पाप नहीं था किसी ईश्वर-अल्लाह का जाप नहीं था न भेदभावकारी वर्ण-व्यवस्था थी मानव जीवन की वो मूल

Read more

भैत्तर हजार की भोड़िया

 डा. नवरत्न पांडे                 भैत्तर हजार की भोड़िया के साथ गांव की साधारण भोड़िया की कहा सुनी हो गयी। बात कहासुनी से शुरू होकर पिलमा पछाड़ी तक पहुँच गयी। एक बुजुर्ग ने दोनों को अलग-अलग कर दिया। फिर दोनों लगी एक दूसरी को कोसने, गालियां देने …. लेकिन गालियां भैत्तर हजार की भोड़िया को भी आती हैं, वह बराबर गालियां

Read more

मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   मुनाजात-ए-बेवा (1884) ए सब से अव्वल1 और आखिर2 जहाँ-तहाँ हाजि़र और नाजि़र3 ए सब दानाओं से दाना4 सारे तवानाओं से तवाना5 ए बाला हर बाला6 तर से चाँद से सूरज से अम्बर से ए समझे बूझे बिन सूझे जाने पहचाने बिन बूझे सब से अनोखे सब से निराले आँख से ओझल दिल के उजाले ए

Read more

अंतहीन संकट

डा. महावीर शर्मा 1929-30 में अमरीका में महामंदी का संकट आया, जिसमें बड़े-बड़े बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान दिवालिया हो गए। दुनिया के शेयर बाजारों में अफरा-तफरी फैल गई। इसका व्यापक असर यूरोप व अन्य देशों पर भी पड़ा। यह महामंदी द्वितीय विश्व युद्ध तक जारी रही। अमरीकन सरकार की ‘न्यू डील’ भी इसका असर दूर करने में असफल रही।

Read more

भेदभाव व जागरूकता के अभाव में उगते समानान्तर सत्ता के द्वीप

मुकेश साढ़े दस साल पहले रोहतक के करौंथा आश्रम व आर्य समाजियों में भी खूनी संघर्ष हुआ था। सेना बुलाकर आश्रम को खाली कराया गया था। बाबा की फौज व भारतीय फौज अपने-अपने मोर्चों पर तीन दिन तक डटी रही थी। पुलिस के साथ बीच-बीच में झड़पें हुई। एक नवयुवक, चार महिलाएं व एक बच्चे को जान से हाथ धोना

Read more

ए हिन्द-पाक के लोगो

अमृतलाल मदान (पिछले पचासों सालों से साहित्य सृजन में सक्रिय वरिष्ठ साहित्यकार अमृतलाल मदान हरियाणा के कैथल शहर के निवासी हैं। नाटक, कविता, उपन्यास, यात्रा आदि लगभग हर विधा में साहित्य रचना कर रहे हैं। प्रगतिशील मूल्य व चेतना इनके साहित्य का केंद्रीय सूत्र है। सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ निरंतर संघर्ष करते रहे हैं।  – सं।) ऐ हिन्द-पाक के लोगो

Read more

जींद विधानसभा उपचुनाव की बिसात

अविनाश सैनी   जींद उपचुनाव का राजनीतिक महत्व यह है कि यह लोकसभा चुनावों की टोन सेट करेगा।  सत्ताधारी पार्टी तो इनेलो-जजपा के आपसी प्रतिद्वंद्व और कांग्रेस की आपसी फूट पर ही अपने जीत को सुनिश्चित मान रही है। उसे अपने कार्यों की अपेक्षा विरोधी दलों की फूट पर अधिक भरोसा है उसके सहारे ही राजनीतिक वैतरणी पार करना चाहती

Read more

लजीज खाना

विनोद सिल्ला कविता मैं जब कई दिनों बाद गया गाँव माँ ने अपने हाथों से बनाई रोटी कद्दू की बनाई मसाले रहित सब्जी रोटी पर रखा मक्खन लस्सी का भर दिया गिलास खाने में जो मजा आया इसके सामने मुझे लगा किसी रैस्टोरैंट का शाही पनीर कुछ भी नहीं

Read more

सूखा

डॉ. निधि अग्रवाल ( गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)  में जन्म। बचपन से पढने और लिखने का शौक। एम बी बी एस के बाद पैथोलॉजी में परास्नातक की शिक्षा। वर्तमान में झांसी (उत्तर ) में निजी रूप से कार्यरत। कविताएँ, कहनियाँ और सामाजिक विषयों पर ब्लॉग आदि का लेखन) सूखा सूख गए सब नदियाँ-पोखर नैना बरसे बन परनाले इस बरस भी न

Read more
« Older Entries