Tag Archives: देसहरियाणा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ तेज हो रहा है आदिवासियों का आंदोलन

आदिवासियों की हुंकार गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को वाईल्ड लाई फ्रस्ट और वन विभाग के कुछ आला रिटायर अधिकारियों की याचिका पर सुनाई करते हुए देश के 20 लाख से अधिक आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जिन लोगों को वन अधिकार कानून 2006 के तहत दावे

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प्रेमचंद की प्रासंगिकता

  आज के समय में प्रेमचंद के साथ हमारा क्या रिश्ता बनता है। प्रेमचंद और हमारे साहित्यकार किस तरह से आने वाली पीढिय़ों को रस्ता दिखाते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। प्रेमचंद 1936 में इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन वे समय बीतने के साथ-साथ और अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। वे 1880 में पैदा हुए और 1907-08

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साहित्य कैसे पढ़ाएं

साहित्य मनुष्यता निर्माण की परियोजना है, उसका अध्ययन-अध्यापन भी इसी संदर्भ में सार्थकता प्राप्त करता है। साहित्यिक रचना के मर्म और सौंदर्य का उद्घाटन ही साहित्य के अध्यापक का काम है। इस कार्य को कैसे किया जाए डा. अशोक भाटिया के 35 सालों के उच्च शिक्षा में अध्यापन व कथा लेखन के अनुभवों सा सार . -डा. अशोक भाटिया

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प्रेमचंद और हमारा समय

  प्रेमचंद ने हिंदी और भारतीय साहित्य को गहरे से प्रभावित किया.साहित्य को यथार्थ से जोड़ा. किसान-मजदूर का शोषण, दलित उत्पीड़न, साम्प्रदायिक-विद्वेष, लैंगिक असमानता की समस्या के विभिन्न पहलुओं पर अपनी कलम चलाई. गोदान, कर्मभूमि, रंगभूमि, प्रेमाश्रम, निर्मला, गबन उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं। अनेक कहानियां लिखी जिंहोंने समाज की चेतना को झकझोरा. कफन, ठाकुर का कआं, सदगति, सवा सेर गेहूं,

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करवा का व्रत – यशपाल

  करवा का व्रत – यशपाल कन्हैयालाल अपने दफ्तर के हमजोलियों और मित्रों से दो तीन बरस बड़ा ही था, परन्तु ब्याह उसका उन लोगों के बाद हुआ। उसके बहुत अनुरोध करने पर भी साहब ने उसे ब्याह के लिए सप्ताह-भर से अधिक छुट्टी न दी थी। लौटा तो उसके अन्तरंग मित्रों ने भी उससे वही प्रश्न पूछे जो प्रायः

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