Tag Archives: देसहरियाणा

हुब्बे वतन

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती की पुण्य तिथि के अवसर पर। हाली का जन्म हुआ था सन् 1837 में और मृत्यु हुई 31 दिसंबर 1914 में। हाली की एक कविता है ‘हुब्बे वतन’ यानी देश-प्रेम।  हरियाणा सृजन उत्सव में जन नाट्य मंच कुरुक्षेत्र ने  25 फरवरी 2017 को इसके एक अंश को प्रस्तुत किया था।  अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   हुब्बे

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चुप की दाद

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती ऐ मांओं बहनों, बेटियों, दुनियां की ज़ीनत1 तुमसे है मुल्कों की बस्ती हो तुम्ही, क़ौमों की इज़्ज़त तुमसे है तुम घर की हो शहज़ादियाँ, शहरों की हो आबादियाँ ग़म गीं दिलों की शादियाँ, दुख-सुख में राहत तुम से है   हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 25 फरवरी 2017 की सांस्कृतिक संध्या में विनोद सहगल द्वारा गाई

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दुपट्टा एक लड़की के गले का फंदा है

हरमन दिनेश जिस मुल्क में बेटियों की भ्रूण हत्या को रोकने के लिए बेटी बचाओ जैसा कैंपेन चलाना पड़े उस देस में बेटियाँ कितनी सशक्त होंगी यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है, जिन बेटियों को कैंपेन चला कर, कानूनी धाराएं लगा कर बचाया गया है उनका भविष्य कहाँ तक सुरक्षित है और वे लड़कियाँ कितनी स्वतंत्र होंगी अपने फैसला

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सुरेन्द्र पाल सिंह – एक सांड और गधे की मौत

लघु कथा बचपन में हमारे घर के बगल में एक रेलवे लाइन पर फाटक था जिसके पास एक जोहड़ था। शहर भर की गायें दिन भर उस जोहड़ पर कुछ पालियों के द्वारा आराम करने के लिए लायी जाती थी और स्वभाविक है कि उन गायों के झुण्ड में एक सांड भी होता था। एक बार ना जाने कहां से

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