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नशा – एक विकराल समस्या -देवदत्त

नशे की शुरुआत को बतौर एक अनुभव, सामाजिक मनोरंजन, कुछ निश्चित हालात में स्व-प्रेरित दवाइयों का प्रयोग और फिर पूर्ण रूप से नशे पर आश्रित होने की आदत के तौर पर देखा और समझा जा सकता है। लेकिन हमारे यहां के परिवेश में बदलते आर्थिक हालात से आई कुछ लोगों में सुख-सुविधा बड़ी संख्या में बढ़ती बेेरोजगारी, तनाव, सामाजिक ताने-बाने में अनेक खामियों, व्यक्तिगत आजादी की अपेक्षा और राजनीति में गिरावट आदि अनेक कारण हो सकते हैं। … Continue readingनशा – एक विकराल समस्या -देवदत्त