Tag Archives: दिनेश दधीचि

नयी सुबह तक

कुरुक्षेत्र, 10 मार्च देस हरियाणा द्वारा स्थानीय महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय में देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिव रमन गौड के काव्य-संग्रह नयी सुबह तक पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में शिव रमन गौड ने अपने काव्य-संग्रह की कविताओं का पाठ किया। संगोष्ठी का शुभारंभ महात्मा

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अंततः

वेंडी बार्कर  अनुवाद दिनेश दधिची एक-दूजे के जलाशय में रहे हम तैरते रात-भर धुलती रही घुलती रही चट्टान तट पर धार से . जल-धार से . खुरदरे सब स्थल हुए समतल, घुले पत्थर, बने बजरी, हुए बालू . उच्चतम इस ज्वार में जल की समूची देह के तल में तरंगित पंक यूँ पैदा हुआ. Wendy Barker At Last we swim

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दिनेश दधीचि – वेंडी बार्कर की Eve Remembers कविता का अनुवाद

Wendy Barker (b. 1942 ) Eve Remembers It was his bending to the path I noticed. A deliberate dip, a sweep of his long arm. Blind, we couldn’t know what lay ahead. He said he was picking up twigs, branches, trying to clear the path. He didn’t want anyone who had to follow us to fall.   वेंडी बार्कर (जन्म

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मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम?

वाल्ट व्हिट्मन (1819-1892) मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम?   मेरी ओर हुए आकर्षित, ऐसे नए व्यक्ति हो तुम? चेता दूँ शुरुआत में तुम्हें, जो कुछ तुमने समझा, उससे— निश्चय ही मैं बहुत अलग हूँ. समझ रहे हो तुम्हें मिलेगा मुझमें ही अपना आदर्श? तुमने सोचा मुझे बनाना अपना प्रेमी, होगा काम बहुत आसान? समझ रहे हो

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घायल हिरण

विलियम काउपर (1731-1800)  अनुवाद दिनेश दधीचि चोट खाया हिरण था मैं, अरसा पहले झुण्ड पुराना छूट गया था, साँस जिधर से लेता हूँ मैं, उधर बहुत-से तीर गड़े थे तन में, गहरे, जब मैं दूर दरख्तों की छाया में, शांत, देह का त्याग करूं, यह इच्छा लेकर अलग हो गया था अपने प्यारे समूह से. वहाँ मुझे एक और मिला अपने जैसा,

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अगर तुम मुझे भुला दोगी

पाब्लो नेरुदा (1904-1973) अनुवाद दिनेश दधीचि  मैं चाहता हूँ कि एक बात तुम जान लो. होता दरअसल यूँ है कि अगर मैं अपनी खिड़की पर धीरे-धीरे आते पतझड़ की लाल टहनी पर स्फटिक जैसे चाँद को देखूँ, या फिर लकड़ी के जलते हुए लट्ठे पर स्पर्शातीत राख को अथवा उसके बदन की झुर्रियों को स्पर्श कर लूं, तो हर चीज़ मुझे

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सॉनेट सत्रह

पाब्लो नेरुदा अनुवाद दिनेश दधीचि मुझे प्यार है तुमसे अनबूझा अनजाना कैसे कब और कहाँ से हुआ, नहीं जानता । सीधे-सीधे प्यार किया करता हूँ तुमसे नहीं जटिलता इसमें औ’ अभिमान नहीं है। तो, तुमसे है प्यार सिर्फ़ इसलिए कि इसके सिवा नहीं मालूम मुझे कोई भी तरीक़ा जहाँ ‘मैं’ नहीं है, तुम भी अस्तित्वहीन हो इतनी हो नज़दीक कि

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आईना

सिल्विया प्लैथ (1932-1963) अनुवाद दिनेश दधीचि   रुपहला हूँ मैं, और बिलकुल सही; बनी-बनाई नहीं धारणा मेरी कोई. जो कुछ भी मैं देखूं उसको तुरत निगल जाता हूँ जैसा हो, बिलकुल वैसा ही. प्यार और नफ़रत धुंधलाती नहीं मुझे. नहीं, नहीं निर्दय, केवल सच्चा हूँ मैं. इक चौकोर देवता की हूँ आँख समझ लो. ज़्यादा वक़्त तो सामने की दीवार पे सोचा करता

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गीत

एस्थर मैथ्यूज़  अनुवाद दिनेश दधीचि नहीं, डियर, मैं प्यार की बात नहीं करती हूँ, मैं जो बात कर रही हूँ, वह और ही कुछ है. प्यार तो इक ऐसी शै है जिसके बारे में मैं कुछ बात करूं – यह बिलकुल नामुमकिन है. लेकिन प्यार नहीं करती हूँ — ये न कहूँगी, ठहरा पानी, तुम जानो, गहरा होता है. इतना

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 सीमाएँ

लिन अंगर (अनुवाद- दिनेश दधीचि) तुम्हारे गिर्द नहीं घूमता है ब्रह्माण्ड. अंतरिक्ष की नृत्यशाला में घूमते हुए ये ग्रह और सितारे तुम्हारे लघु जीवन से बिलकुल बाहर एक-दूसरे के साथ करते हैं नर्तन. गुरुत्वाकर्षण और ऋतुएँ तुम्हारी पकड़ से बाहर हैं; हवा और पानी पर भी तुम्हारा कोई नियंत्रण नहीं. तो क्यों न इन्हें जाने ही दिया जाए? तुम काल

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