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प्रतिभा और आरक्षण – रजनी दिसोदिया

आजकल आरक्षण विरोध का जो मुद्दा गरमाया है उसमें भी बड़ा कंफ्यूजन है। क्या यह पूरी आरक्षण व्यवस्था का विरोध है या अन्य पिछड़ा वर्ग के 27% आरक्षण का विरोध है या यह पिछले सत्तर वर्षों से भीतर ही भीतर सुलगती उस खुन्नस का विस्फोट है जिसे इस ओ.बी.सी. आरक्षण ने और हवा दे दी है।

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जाति-व्यवस्था का क्षय हो – ई. वी. रामासामी पेरियार

उच्च जाति के धूर्त व्यक्तियों ने अत्यन्त धूर्ततापूर्वक जाति और धर्म को आपस में जोड़ दिया; ताकि उनको अलग करना मुश्किल हो जाए। इसलिए, जब आप जाति को नष्ट करने का प्रयास करते हैं, तो आपको यह डर नहीं लगना चाहिए कि धर्म भी नष्ट हो जाएगा।

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कुछ कविताएँ- असंघोष

मध्यप्रदेश के क़स्बा जावत में 1962 में जन्मे असंघोष नई पीढ़ी की दलित कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं. खामोश नहीं हूँ मैं,
हम गवाही देंगे, मैं दूँगा माकूल जवाब, समय को इतिहास लिखने दो, हम ही हटाएँगे कोहरा, ईश्वर की मौत आदि सभी काव्य संग्रह सन् 2000 के बाद प्रकाशित हुए हैं. दुसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि असंघोष इस सदी के दलित चेतना के निरंतर सक्रिय कवियों में अग्रणी हैं.

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दलित विमर्श के अंतर्विरोध- अमरनाथ

दलित आन्दोलन का उद्देश्य क्या होना चाहिए ? –एक ऐसे समाज की स्थापना जिसमें सामाजिक –आर्थिक विषमता न हो, जो ऊंच-नीच की अवधारणा से रहित हो और जो सामाजिक समानता पर आधारित हो. किसी भी सिद्धांत को परखने की कसौटी उसका व्यवहार है. (लेख से)

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अछूत समस्या – भगतसिंह

Post Views: 17 काकीनाडा में 1923 मे कांग्रेस-अधिवेशन हुआ। मुहम्मद अली जिन्ना ने अपने अध्यक्षीय भाषण मे आजकल की अनुसूचित जातियों को, जिन्हें उन दिनों ‘अछूत’ कहा जाता था, हिन्दू…

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गुरु रविदास और उनका बेगमपुरा – सुभाष चन्द्र

Post Views: 254 मध्यकालीन संतों और भक्तों के जन्म-मृत्यु व पारिवारिक जीवन के बारे में आमतौर पर मत विभिन्नताएं हैं। संत रविदास की कृतियों में उनके रैदास, रोहीदास, रायदास, रुईदास…

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हाथरस प्रकरण पर तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट- डॉ.पूनम तुषामड़

बीते 11 अक्टूबर, 2020 को दिल्ली से सात लोगों का एक तथ्यान्वेषी दल उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव के लिए रवाना हुआ। इस दल में प्रो. हेमलता महिश्वर, डॉ.रजत रानी मीनू, डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी,डॉ. सीमा माथुर, डॉ. पूनम तुषामड़, फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार व मीडियाकर्मी मनोज पिप्पल शामिल थे।

छुआछूत और सिक्ख पंथ: सौ साल पहले की कहानी- सुरेन्द्र पाल सिंह

जन्म – 12 नवंबर 1960 शिक्षा – स्नातक – कृषि विज्ञान स्नातकोतर – समाजशास्त्र सेवा, व्यावहारिक मनौवि‌ज्ञान, बुद्धिस्ट स्ट्डीज – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत लेखन – सम सामयिक मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित सलाहकर – देस हरियाणा कार्यक्षेत्र – विभिन्न संस्थाओं व संगठनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों विशेष तौर पर लैंगिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय, सांझी संस्कृति व साम्प्रदायिक सद्भाव के निर्माण में निरंतर सक्रिय, देश-विदेश में घुमक्कड़ी में विशेष रुचि-ऐतिहासिक स्थलों, घटनाओं के प्रति संवेदनशील व खोजपूर्ण दृष्टि। पताः डी एल एफ वैली, पंचकूला मो. 98728-90401