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तीन कविताएं- दयाल चंद जास्ट

Post Views: 15 1. कितना दुखद होता है वह लम्हा जब औरत की होती है खरीद-फरोख्त होती है जबरन शादी   होता है उसके साथ दुष्कर्म और पुलिस लेती रहती है सपना कि गली-गली और कूचे-कूचे सब सुरक्षित हैं।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब कोई बेरोजगार रह जाता है नौकरी लगने से होती रहती है प्रतिभाओं के साथ ज्यादती वह रोता है अपनी डिग्रियों को देखकर और अफसर खेलते हैं नोटों में प्रचार कि साफ-सुथरी भर्ती हुई है।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब हार जाता है सच्चा इंसान बिक जाते हैं गवाह और बिक जाते हैं जज साहब वह उम्र-भर सडता है सलाखों के पीछे कि न्याय भटक जाता है पथ से।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब अन्न-भंडार भरे होते हैं मंडियों में और भूख से मर जाए कोई बच्चा होता रहता है आयात-निर्यात…

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दयाल चंद जास्ट की कविताएं

Post Views: 658 (दयाल चंद जास्ट, रा.उ.वि.खेड़ा, करनाल में हिंदी के प्राध्यापक हैं। कविता लेखन व रागनी लेखन में निरंतर सक्रिय हैं) (1) मैं सूखे पत्ते सी उड़ रही हूं…

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काव्य-गोष्ठी का आयोजन

Post Views: 208 अरुण कैहरबा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इंद्री के प्रांगण में 28 अक्तूबर 2018 को सृजन मंच इन्द्री के तत्वावधान में देस हरियाणा काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया…