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तोड़ती पत्थर – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Post Views: 9 वह तोड़ती पत्थर;देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर-वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादारपेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार;श्याम तन, भर बंधा यौवन,नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन,गुरु…