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तुम ने अब इंसाफ़ की भी रस्म उल्टी क्यों चला दी – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 154 ग़ज़ल तुम ने अब इंसाफ़ की भी रस्म उल्टी क्यों चला दी, सब गुनहगारों को बख़्शा, बेगुनाहों को सज़ा दी। कुछ चिराग़ों से भी मिट सकते थे

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