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सुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएं

सुरजीत सिरड़ी हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में रहते हैं तथा पेशे से एक शिक्षक हैं। सुरजीत मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। इनकी कविताओं में इतिहास के साथ संवाद के समानांतर वर्तमान राजनैतिक चेतना भी नजर आती है जो पाठक को एक पल के लिए ठहरकर सोचने को विवश करती है। प्रस्तुत है उनकी तीन कविताएं-

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तीन कविताएं- दयाल चंद जास्ट

Post Views: 14 1. कितना दुखद होता है वह लम्हा जब औरत की होती है खरीद-फरोख्त होती है जबरन शादी   होता है उसके साथ दुष्कर्म और पुलिस लेती रहती है सपना कि गली-गली और कूचे-कूचे सब सुरक्षित हैं।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब कोई बेरोजगार रह जाता है नौकरी लगने से होती रहती है प्रतिभाओं के साथ ज्यादती वह रोता है अपनी डिग्रियों को देखकर और अफसर खेलते हैं नोटों में प्रचार कि साफ-सुथरी भर्ती हुई है।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब हार जाता है सच्चा इंसान बिक जाते हैं गवाह और बिक जाते हैं जज साहब वह उम्र-भर सडता है सलाखों के पीछे कि न्याय भटक जाता है पथ से।   कितना दुखद होता है वह लम्हा जब अन्न-भंडार भरे होते हैं मंडियों में और भूख से मर जाए कोई बच्चा होता रहता है आयात-निर्यात…