Tag Archives: तारा पांचाल

मीह बरसा दे राम – हरियाणवी गीत (तारा पाँचाल)

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सरबजीत, तारा पांचाल और पिलखन का पेड़

ओमसिंह अशफाक सरबजीत (30-12-1961—13-12-1998) दोस्तों का बिछडऩा बड़ा कष्टदायक होता है। ज्यों-ज्यों हमारी उम्र बढ़ती जाती है पीड़ा सहने की शक्ति भी क्षीण होती रहती है। जवानी का जोश तो बड़े-बड़े सदमें झेल जाता है, परन्तु उम्र के साथ ज्यों-ज्यों शारीरिक क्षमता घटती है, त्यों-त्यों मनोबल पर भी नकारात्मक प्रभाव बढ़ता जाता है और दुख हमें तोडऩे लगता है। कुछ

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तारा पांचाल – फूली

कहानी उचटी नींद के ऊल-जलूल सपने और उन सपनों के शुभ-अशुभ विचार। दुली के परिवार में कुछ दिनों से ऐसे ही सपने देखे जा रहे थे। कभी-कभी ये सपने लाल मिर्च की चटनी जैसे चरचरे होते। इस के विपरीत कभी-कभी काली लाल चाय से भी मीठे लगते। आखिरकार सभी सपने सामने बंधी फूली पर खत्म होते। फूली अगले महीने आसुज

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय के यथार्थ की जटिलता, व्याकुलता, बेचैनी तथा उपभोक्तावादी समाज में बदल रहे सामाजिक संबंधों व सामाजिक संकट के विभिन्न आयामों को बेबाकी से अभिव्यक्त किया। विवेक के पास कथा कहने का विशिष्ठ कौशल

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