Tag: तारा पांचाल

दरअसल- तारा पांचाल

Post Views: 483 कहानी (तारा पांचाल 28 मई,1950 – 20 जून, 2009।  ‘सारिका’, ‘हंस’, ‘कथन’, ‘वर्तमान साहित्य’, ‘पल-प्रतिपल’, ‘बया’, ‘गंगा’, ‘अथ’, ‘सशर्त’, ‘जतन’, ‘अध्यापक समाज’, ‘हरकारा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में

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जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

Post Views: 391 सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी,गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने।जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइयाउन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने।        – करतार सिंह सराभा यह साल

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सरबजीत, तारा पांचाल और पिलखन का पेड़ -ओमसिंह अशफाक

Post Views: 480 ओमसिंह अशफाक सरबजीत (30-12-1961—13-12-1998) दोस्तों का बिछडऩा बड़ा कष्टदायक होता है। ज्यों-ज्यों हमारी उम्र बढ़ती जाती है पीड़ा सहने की शक्ति भी क्षीण होती रहती है। जवानी

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मां की ना कहिए, न्या की कहिए – तारा पांचाल

Post Views: 201 समाज अपने समय की सच्चाई को अपने रचनाकारों की आंख से देखता है। यह जानना हमेशा ही रोचक होता है कि रचनाकार अपने समय को कैसे देखते

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कहानियों के बीच बोलता : तारा पांचाल

Post Views: 378 डा. सुभाष चंद्र हरियाणा के छोटे से पिछड़े कस्बे नरवाना (बकौल तारा पांचाल नरवाना कंट्री)में जन्मे तारा पांचाल एक कहानीकार के तौर पर पूरे देश में प्रतिष्ठित

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सरबजीत की याद में -तारा पांचाल

Post Views: 156 कविता बहुत उजालों में लिए तुम अपने आसपास नन्हें-नन्हें जुगनुओं जैसे सूरजों के बीच इसलिए दूरी बनी रही तुम्हारे, और तुम्हारी कविताओं के अंधेरे के बीच। पर

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फूली – तारा पांचाल

Post Views: 766 उचटी नींद के ऊल-जलूल सपने और उन सपनों के शुभ-अशुभ विचार। दुली के परिवार में कुछ दिनों से ऐसे ही सपने देखे जा रहे थे। कभी-कभी ये

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

Post Views: 732 ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय

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