Tag Archives: ज्ञान प्रकाश विवेक

फासला

ज्ञान प्रकाश विवेक वालैंट्री रिटायरमेंट स्कीम किसी उपकार की तरह पेश की गई थी, जिसमें लफाज्जियों का तिलिस्म था और कारपोरेट  जगत का मुग्धकारी छल! इस छल का मुझे बाद में पता चला। फिलहाल तो मैं इस बाईस लाख के चैक को देखकर अभिभूत था, जो मुझे कम्पनी ने थमाया था। बाईस लाख! मैं तो उछल पड़ा था। मैं खुद

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय के यथार्थ की जटिलता, व्याकुलता, बेचैनी तथा उपभोक्तावादी समाज में बदल रहे सामाजिक संबंधों व सामाजिक संकट के विभिन्न आयामों को बेबाकी से अभिव्यक्त किया। विवेक के पास कथा कहने का विशिष्ठ कौशल

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विपिन सुनेजा ‘शायक’- हरियाणा में फलती-फूलती हिन्दी ग़ज़ल

गजल ग़ज़ल काव्य की बड़ी ही सुंदर विधा है। गज़ल शेरों की एक लड़ी होती है। जिसके शे’र में सूक्ष्म मनोभावों की आलंकारिक अभिव्यक्ति होती है। इतिहास बताता है कि हिन्दी ग़ज़ल तो तेरहवीं शताब्दी में लिखी जाने लगी थी, उन्नीसवीं शताब्दी में हिन्दी कवियों का ध्यान फिर $गज़ल की ओर गया, लेकिन सफलता मिली बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में।

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तरक्कीपसंद शायर आबिद आलमी की ग़ज़लगोई

आलेख ज्ञान प्रकाश विवेक देश का विभाजन एक न भूलने वाली घटना थी। यह एक ऐसी त्रासदी थी, जिसने भूगोल ही नहीं, अवाम को भी तकसीम करके रख दिया। जो उधर से लोग विस्थापित होकर इधर आए, उन्हें शरणार्थी कहा गया। जो यहां से पाकिस्तान जा बसे वो मोहाजि़रों की तरह जीवन जीने को अभिशप्त रहे। विस्थापन ने अजीब-सी वेदना

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बौद्धिक साहस और कल्पना की उदात्त तीव्रता का स्वर – आबिद आलमी

ओम प्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधीचि आबिद आलमी के ग़ज़ल-संग्रह ‘नये ज़ाविए’ का मुख्य स्वर सीधी टकराहट का, जोखिम उठाने का है। आबिद आलमी के लिए सृजनात्मकता की यह एक अनिवार्य शर्त है कि जाने-पहचाने तौर-तरीकों की हदों से बाहर निकला जाए- ‘नज़र से आगे नये फ़ासले तलाश करें। वो जो खयाल में हैं रास्ते तलाश करें।।’ चूंकि जीवन के

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