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जोगी मन नी रंगाया – कबीर

Post Views: 718 साखी – सिद्ध भया तो क्या भया, चहु दिस1 फूटी बास2। अंदर वाके  बीज है, फिर उगन की आस3। टेक जोगी मन नी रंगाया, रंगाया कपड़ा। पाणी में

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