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जीन्दे जी का मेल जिन्दगी – कर्मचंद केसर

Post Views: 203 हरियाणवी ग़ज़ल जीन्दे जी का मेल जिन्दगी। च्यार दिनां का खेल जिन्दगी। फल लाग्गैं सैं खट्टे-मीठे, बिन पात्यां की बेल जिन्दगी। किसा अनूठा बल्या दीवा, बिन बात्ती…