Tag Archives: जाति

डा भीम राव आंबेडकर का जाति के खिलाफ संघर्ष

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डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल – विकल्प की कोई एक अवधारणा नहीं

आलेख             विकल्प का सवाल आज पहले से भी जटिल हो गया है, लेकिन विकल्प की अनिवार्यता में कोई अन्तर नहीं आया है। आप ने इस परिचर्चा का विषय रखा है ‘विकल्प की अवधारणा’। लेकिन मेरे विचार से विकल्प की कोई एक अवधारणा नहीं है। मसलन, एक विकल्प यह हो सकता है कि वर्तमान समाज-व्यवस्था

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मदन भारती – जात

कविता जात कैसी होती है उसका रंग कैसा होता है उसकी पहचान क्या होती रूप कैसा होता है कितनी बड़ी होती दृश्य या अदृश्य गुमान, गर्व या घमण्ड या फिर एक सिरफिरा अहंकार जात एक जात होती है जात मतलब जन्म मतलब! जन्मजात इसे रंग रूप आकार से पहचानना एक नकल की परीक्षा का स्वांग है। जात इतराने के खूब

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डा. सुभाष चंद्र – हरियाणा में  दलित दशा, उत्पीड़न व प्रतिरोध

सामाजिक न्याय पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में दलित उत्पीड़न के जघन्य कांड हुए हैं जिस कारण हरियाणा का समाज राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। हरियाणा का समाज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं तो दलित वर्ग की ओर से तीखा प्रतिरोध भी हो रहा है।

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