Tag Archives: जलियांवाला बाग

जलियांवाला बाग का बसन्त – सुभद्राकुमारी चौहान

  यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग़ सा बना पड़ा है, हा! यह प्यारा बाग़ ख़ून से सना पड़ा है। ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु धीरे से आना, यह है शोक-स्थान यहाँ मत शोर मचाना।

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सुभाष चंद्र – शहीद उधम सिंह का बचपन

शहीद उधम सिंह की आत्मकथा सेवा देश दी जिंदड़ीए बड़ी ओखी, गल्लां करनियां ढेर सुखल्लियां ने। जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइया उन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने। ये पंक्तियां मेरी जेब में हमेशा ही रहती हैं। अपने करतार सिंह सराभा के गीत की हैं। सराभा ? साढ़े उन्नीस साल की उम्र में ही फांसी पर चढ़ाया गया था उसे। गदर

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शहीद उधम सिंह का मुकद्दमा

उधम सिंह का मुकद्दमा (4 जून 1940 को ओल्ड बैले की केंद्रीय अपराध अदालत में शुरू हुआ) ताज बनाम उधम सिंह जज : एंटकिंसन अदालती कारवाई का नेतृत्व कर रहा था। ज्यूरी में 10 आदमी और 2 औरतें शामिल थे।सरकारी वकील : मि.जी.बी मैलिऊर, मिस्टर सी हमफरे और मिस्टर जार्डिन थे। उधमसिंह के वकील:     मि. सेंट जौहन हुचिकसन, के.सी., मिस्टर आर.ई

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ऊधम सिंह नै सोच समझ कै – रणबीर सिंह दहिया

रागनी ऊधम सिंह नै सोच समझ कै करी लन्दन की जाने की तैयारी।। राम मुहम्मद नाम धरया और पास पोर्ट लिया सरकारी।। किस तरियां जालिम डायर थ्यावै चिन्ता थी दिन रात यही बिना बदला लिये ना उल्टा आऊं हरदम सोची बात यही उनै मौके की थी बाट सही मिलकै उंच नीच सब बिचारी।। चौबीस घण्टे उसकै लाग्या पाछै यो मौका

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धांय धांय धांय होई उड़ै(शहीद उधम सिंह) – रणबीर सिंह दहिया

रागनी धांय धांय धांय होई उड़ै दनादन गोली चाली थी। कांपग्या क्रैक्सटन हाल सब दरवाजे खिड़की हाली थी।। पहली दो गोली दागी उस डायर की छाती के म्हां मंच तै नीचैं पड़ग्या ज्यान ना रही खुरापाती के म्हां काढ़ी गोली हिम्माती के म्हां खतरे की बाजी टाली थी।। लार्ड जैट कै लागी जाकै दूजी  गोली दागी थी लुई डेन हेन

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