Tag: जनवादी साहित्यकार

रूठने वाले तो हम से फिर गले मिलने लगे हैं – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 148 ग़ज़ल रूठने वाले तो हम से फिर गले मिलने लगे हैं, फिर भी अपने दरमियाँ1 रिश्ते नहीं है-फ़ासिले हैं। कैसे मानूं इन सभी को गुमरही का शौक़

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साहित्य और राजनीति के अंत:सम्बन्ध – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

Post Views: 1,013 आलेख साहित्य और राजनिति में जो फर्क है, वह तो ई. एम. एस. ने स्पष्ट कर ही दिया है कि राजनीति में ”अपनी सत्ता को बनाये रखने

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