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गाँधीवादी आलोचक विश्वनाथप्रसाद तिवारी – अमर नाथ

“ महान साहित्य घृणा नहीं, करुणा पैदा करता है. घृणित चरित्र के प्रति भी एक गहरी करुणा. यदि साहित्य घृणा, हिंसा और असहिष्णुता पैदा करने लगे तो दुनिया बदरंग हो जाएगी. रचना हृदय परिवर्तन की एक अहिंसक प्रक्रिया है. वह हिंसा का विकल्प नहीं है.” … Continue readingगाँधीवादी आलोचक विश्वनाथप्रसाद तिवारी – अमर नाथ