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इतनी आसान ये रहगुज़र भी नहीं – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 114 ग़ज़ल इतनी आसान ये रहगुज़र1 भी नहीं, साथ अपने कोई हम सफ़र भी नहीं। मेहरबां हम पे उन की नज़र भी नहीं, कोई तरकीब अब कारगर भी…

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विपिन सुनेजा 'शायक’- हरियाणा में फलती-फूलती हिन्दी ग़ज़ल

Post Views: 1,003 गजल ग़ज़ल काव्य की बड़ी ही सुंदर विधा है। गज़ल शेरों की एक लड़ी होती है। जिसके शे’र में सूक्ष्म मनोभावों की आलंकारिक अभिव्यक्ति होती है। इतिहास…

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देखने में बेदरो-दीवार सा मैं इक मकां हूं -आबिद आलमी

जो लिखते फिरते हैं एक-इक मकां पे नाम अपना
उन्हें बता दो कि इक दिन हिसाब भी होगा
रात का वक़्त है संभल के चलो
ख़ुद से आगे ज़रा निकल के चलो
गर बदल सकता है औरों की तरह चेहरा बदल ले
वरऩा इस बहरूपियों के शहर से फ़ौरन निकल ले

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तरक्कीपसंद शायर आबिद आलमी की ग़ज़लगोई – ज्ञान प्रकाश विवेक

Post Views: 835 देश का विभाजन एक न भूलने वाली घटना थी। यह एक ऐसी त्रासदी थी, जिसने भूगोल ही नहीं, अवाम को भी तकसीम करके रख दिया। जो उधर…

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बौद्धिक साहस और कल्पना की उदात्त तीव्रता का स्वर आबिद आलमी – – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधिची

Post Views: 615  आबिद आलमी के ग़ज़ल-संग्रह ‘नये ज़ाविए’ का मुख्य स्वर सीधी टकराहट का, जोखिम उठाने का है। आबिद आलमी के लिए सृजनात्मकता की यह एक अनिवार्य शर्त है…

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अपणा खोट छुपाणा सीख – मंगतराम शास्त्री

Post Views: 603 औरां कै सिर लाणा सीख, अपणा खोट छुपाणा सीख। खोट कर्या पछतावै ना, मंद-मंद मुस्काणा सीख। हाथ काम कै ला ना ला, बस फोए से लाणा सीख।…