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राम लगती बात – चौधरी छोटू राम

Post Views: 427 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह किसान कहता है कि मैं सरकार की रईयत हूं। मुझे सरकार को टैक्स देने में कोई आपत्ति नहीं। मेरे हिस्से का जो…

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बोलना सीख – चौधरी छोटू राम

Post Views: 446 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह जब मैंने यह सिलसिला शुरू किया तो इसको चारों ही लेखों पर समाप्त करने का इरादा था, लेकिन मुझे विश्वास दिलाया गया…

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साहूकार का फंदा – चौधरी छोटू राम

Post Views: 502 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह बादल आया। वर्षा होने की संभावना हुई। किसान ने कस्सी कंधे पर रखी और खेत की राह ली। समझता है कि अगर…

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कागजी हकूमत – चौधरी छोटू राम

Post Views: 382 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह जी चाहता है कि शिमला की ऊंची पहाड़ियों पर रहने वाले सरकारी अफसरों को और लाहौर की ठंडी सड़क और सुंदर पार्कों…

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हरियाणा में अन्नदाता पर आफत -ललित यादव

Post Views: 262 किसानों के हितों के लिए केंन्द्र के साथ राज्य सरकार ने भी घोषणाएं करने में तो कोई कमी नहीं छोड़ी पर तस्वीर वैसी नहीं है जैसी आम…

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हरियाणा में खेती किसानी-विमर्श -सुरेंद्र कुमार

Post Views: 750                 आधुनिक हरियाणा में कृषि को समझने के लिए कोई एक सिद्धांत या एक वैचारिक फार्मूला काम में नहीं लाया जा सकता। जब हम पहले के अध्ययनों…

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डॉ. आम्बेडकर किसान नेता के रूप में-विनोद कुमार

Post Views: 665 आलेख अर्थशास्त्री, राजनेता, मंत्री लेखक, संविधान निर्माता  आदि सभी रूपों और परिस्थितियों में डा.आम्बेडकर ने किसान हित की अनदेखी नहीं की। वे समय-समय पर सभी रूपों में…

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हरियाणा में खेती-किसानी का गहराता संकट -महावीर शर्मा

    खेती का घाटे का सौदा बनना, नीतियों का मामला है। यह खेती के कारपोरेटीकरण का मामला है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय मसला है। इसके मायने हैं, फसल के बीजों, भावों, सबसिडी व तकनीकों का फैसला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डब्ल्यूटीओ आदि में होना। भारत में अभी भी आधी आबादी सीधे तौर पर खेती-किसानी से जुड़ी है। यहां उपरोक्त माडल के लागू होने का मतलब होगा 60 करोड़ लोगों का बेरोजगार हो जाना। इतनी बड़ी संख्या को कहां खपाया जाएगा, जबकि दूसरे सभी क्षेत्रों में रोजगार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। हरियाणा उपरोक्त माडल के लागू होने की अग्रणी प्रयोगशाला है। भारी संख्या में किसानों को बड़ी रकम के क्रेडिट कार्ड देकर वापस यही पैसा मालों के उपयेाग में लगवा लेने की सरकारी योजना इसी साजिश का हिस्सा है। यह एक तरह से बड़े पैमाने पर खेती की जमीनों का जबरन हस्तांतरण साबित होगा।