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जैविक खेती को ‘हरित क्रांति’ के केंद्र हरियाणा में मिली बड़ी सफलता – राजेंद्र चौधरी

12 सितम्बर 2021 को रोहतक (हरियाणा) में आयोजित ‘जैविक खेती जन संवाद’ में लगभग 300 लोगों ने भाग लिया. पहली बार कुदरती खेती अभियान, जो एक अपंजीकृत एवं अवित्पोषित स्वयंसेवी प्रयास है, द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कृषि से जुड़ी सरकारी संस्थाओं जैसे हिसार कृषि विश्वविद्यालय, हरियाणा बागवानी विभाग इत्यादि के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. 

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मुग़लकालीन किसान आंदोलन – सूरजभान भारद्वाज

Post Views: 42 मुग़लकालीन किसान आंदोलन से संबंधित इतिहास के विद्वानों ने बहुत कम लिखा है। बहुत पहले इरफ़ान हबीब ने अपनी पुस्तक, Agrarian System of Mughul India 1963  प्रकाशित की थी।…

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किसानी चेतना की चार कविताएं- जयपाल

Post Views: 27 जयपाल अपनी कविताओं में हमारे समय के यथार्थ के विभिन्न पक्षों को बहुत विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करते हैं। सामाजिक-शक्तियों के बीच चल रहे संघर्षों का वर्णन…

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वर्तमान किसान आंदोलन: एक नज़र- सुरेन्द्र पाल सिंह

हिंदू- मुस्लिम- सिक्ख ने अपनी अपनी नकारात्मक विरासतों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया है और यही है इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी। (लेख से )

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किसान- गौहर रज़ा

गौहर रज़ा (जन्म 17 अगस्त 1956) पेशे से एक भारतीय वैज्ञानिक हैं, और एक प्रमुख उर्दू कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और वृत्तचित्र फिल्म निर्माता, जो आम जनता के बीच विज्ञान की समझ को लोकप्रिय बनाने के लिए काम कर रहे हैं.
प्रस्तुत है किसान संघर्ष से प्रेरित गौहर रज़ा की एक नज़्म ‘किसान’

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किसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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किसानी चेतना के हरियाणवी गीत और रागनियाँ – मंगत राम शास्त्री

मंगत राम शास्त्री- जिला जींद के ढ़ाटरथ गांव में सन् 1963 में जन्म। शास्त्री (शिक्षा शास्त्री), हिंदी तथा संस्कृत में स्नातकोत्तर। साक्षरता अभियान में सक्रिय हिस्सेदारी तथा समाज-सुधार के कार्यों में रुचि। ज्ञान विज्ञान आंदोलन में सक्रिय भूमिका। “अध्यापक समाज” पत्रिका का संपादन। कहानी, व्यंग्य, गीत, रागनी एंव गजल विधा में निरंतर लेखन तथा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। “अपणी बोली अपणी बात” नामक हरियाणवी रागनी-संग्रह प्रकाशित।

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सुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएँ

सुरजीत सिरड़ी हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में रहते हैं तथा पेशे से एक शिक्षक हैं। सुरजीत मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। इनकी कविताओं में इतिहास के साथ संवाद के समानांतर वर्तमान राजनैतिक चेतना भी नजर आती है जो पाठक को एक पल के लिए ठहरकर सोचने को विवश करती है।
एक साहित्यकार का दायित्व है कि वो अपने आस पास घट रही घटनाओं पर पैनी नजर रखे; इन कविताओं में गम्भीर किसान विमर्श नजर आता है. प्रस्तुत है किसानी चेतना से लबालब उनकी तीन कविताएं-