Tag: कैथल

ऐ हिंद पाक के लोगों – अमृतलाल मदान

Post Views: 217 अमृतलाल मदान (पिछले पचासों सालों से साहित्य सृजन में सक्रिय वरिष्ठ साहित्यकार अमृतलाल मदान हरियाणा के कैथल शहर के निवासी हैं। नाटक, कविता, उपन्यास, यात्रा आदि लगभग

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तुर्कों की निरंकुशता के विरुद्ध-संघर्ष – बुद्ध प्रकाश

Post Views: 574 बुद्ध प्रकाश 24 जून, 1206 को कुतबुद्दीन ऐबक दिल्ली के राजसिंहासन पर बैठा और उत्तरी भारत के तुर्क राज्य की प्रतिष्ठापना की। मध्यवर्ती एशिया के धर्मांध तथा

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ए हिन्द-पाक के लोगो – अमृल लाल मदान

Post Views: 243 अमृतलाल मदान (पिछले पचासों सालों से साहित्य सृजन में सक्रिय वरिष्ठ साहित्यकार अमृतलाल मदान हरियाणा के कैथल शहर के निवासी हैं। नाटक, कविता, उपन्यास, यात्रा आदि लगभग

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सादी भोली प्यारी माँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 293 हरियाणवी ग़ज़ल सादी भोली प्यारी माँ, सै फुल्लां की क्यारी माँ। सबके चरण नवाऊं मैं, मेरी हो चै थारी माँ। सारी दुनियां भुल्ली जा, जाती नहीं बिसारी

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नफरत नै भी प्रीत समझ ले – कर्मचंद केसर

Post Views: 188 हरियाणवी ग़ज़ल नफरत नै भी प्रीत समझ ले, सबनैं अपणा मीत समझ ले। लय, सुर, ताल सहीं हों जिसके, जिन्दगी नै वा गीत समझ ले। आदर तै

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गलती इतनी भारी नां कर – कर्मचंद केसर

Post Views: 197  हरियाणवी ग़ज़ल   गलती इतनी भारी नां कर। रुक्खां कान्नी आरी नां कर। मीठी यारी खारी नां कर, दोस्त गैल गद्दारी नां कर। नुमाइस की चीज नहीं

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कोय देख ल्यो मेहनत करकै – कर्मचंद केसर

Post Views: 142 हरियाणवी ग़ज़ल कोय देख ल्यो मेहनत करकै। फल के कड़छै मिलैं सैं भरकै। पत्थर दिल सैं लीडर म्हारे, उनके कान पै जूँ ना सरकै। जिन्दगी नैं इसा

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बुरे मणस का सग करै क्यूँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 184 हरियाणवी ग़ज़ल बुरे मणस का सग करै क्यूँ। मन की स्यान्ति भंग करै क्यूँ। मानवता कै बट्टा लाग्गै, दीन दुखी नैं तंग करै क्यूँ। काग बणैं नां

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दुक्ख की इसी होई बरसात – कर्मचंद केसर

Post Views: 344 हरियाणवी ग़ज़ल दुक्ख की इसी होई बरसात। निखर गया सै मेरा गात। बिद्या बिन नर रह्ये अनाड़ी, जणु कोय दरखत सै बिन पात। बूढ़े माँ-बापां की खात्तर,

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मुसाफिर जाग सवेरा होग्या – कर्मचंद केसर

Post Views: 249 हरियाणवी ग़ज़ल मुसाफिर जाग सवेरा होग्या। चाल आराम भतेरा होग्या। कलजुग म्हं सच चढ़ग्या फांसी, झूठे के सिर सेहरा होग्या। सारा कुणबा मिलकै रह था, इब सबका

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