Tag Archives: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय

सावित्रीबाई फुले : जीवन जिस पर अमल किया जाना चाहिए

7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन 09 Jan 2018 7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया I इस कार्यक्रम

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हिंदी साहित्य अध्ययन-अध्यापनः चुनौतियां और सरोकार

प्रोफेसर सुभाष चंद्र, हिंदी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय,कुरुक्षेत्र  1922-25 के आस-पास बी.एच.यू. और इलाहाबाद में हिन्दी विभाग खुलने शुरू हुए थे। अभी  उच्च शिक्षा में एक विषय के तौर पर हिंदी साहित्य-अध्ययन के सौ साल भी नहीं हुए हैं, लेकिन हिंदी साहित्य के अध्ययन अध्यापन के भविष्य को लेकर चिंताएं प्रकट होने लगी हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ,बाबू श्याम सुंदर दास

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सुभाष चंद्र – वैचारिक योद्धा डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

डा ओमप्रकाश ग्रेवाल बदलाव के लिए प्रयासरत सक्रिय बुद्धिजीवी थे। हरियाणा के साहित्यिक-सांस्कृतिक परिवेश को उन्होंने गहरे से प्रभावित किया। रचनाकारों-संस्कृतिकर्मियों से हमेशा विमर्श में रहे। उनकी उपस्थिति किसी भी साहित्यिक संगोष्ठी-सेमिनार को बौद्धिक शिखर पर पहुंचा देती थी। डा. ग्रेवाल मार्गदर्शक, दोस्त व गंभीर पाठक-आलोचक के रूप में हमेशा ही उपलब्ध रहते थे। उनकी प्रखर बौद्धिकता, गहरे सामाजिक सरोकार,

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प्रो. भीम सिंह दहिया- अँग्रेजी साहित्य शिक्षण में प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल का योगदान

संस्मरण जाने-माने शिक्षाविद प्रोफेसर भीम सिंह दहिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। इस से पहले वे महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय , रोहतक में रजिस्ट्रार और इसी विश्वविद्यालय के अँग्रेजी विभाग में प्राध्यापक के तौर पर भी कार्यरत रहे। वे प्रो. ओ.पी.ग्रेवाल के नज़दीकी मित्रों में से एक हैं और साथी प्राध्यापक एवं शिक्षाविद के रूप

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राजबीर पाराशर – डॉ. ग्रेवाल को याद करते हुए

संस्मरण             प्रो. ओ.पी. ग्रेवाल ने अपने जीवनकाल में विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में अध्यापन कार्य करते हुए बहुत से विद्यार्थियों को असाधारण ढंग से प्रभावित किया और इस प्रकार ऐसे शिष्यों की पौध तैयार हुई जो उन के सामाजिक सरोकारों को अपने-अपने ढंग से आगे बढ़ाने में प्रयासरत हैं। डा. राजबीर पाराशर ऐसे ही एक शिष्य हैं जिन्होंने प्रो. ग्रेवाल

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वी.बी.अबरोल – डॉ. ओम प्रकाश ग्रेवाल : एक जुझारू अध्यापक

संस्मरण प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल के सौम्य, शालीन व्यक्तित्व में ही कहीं छिपा था एक जुझारूपन जो इन्सानी कद्रों के साथ हो रही बेइंसाफी के प्रति विरोध की भावना से अपनी खुराक पाता था। उच्च कोटि का विद्वान होने के साथ-साथ वे मानवीय मूल्यों और न्यायोचित व्यवस्था के पक्षधर भी थे। उन की शख्सियत के इसी पहलू को उजागर करता

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डा. हरविन्द्र सिंह – हरियाणा में पंजाबी भाषा

भाषा विमर्श ‘पंजाबी’ शब्द से तात्पर्य पंजाब का निवासी होने से भी है और यह पंजाब-वासियों की भाषा भी है। पंजाब की यह उत्तम भाषा ‘गुरमुखी’ लिपि में लिखी जाती है।1 पंजाबी भाषा की वर्णमाला जो शारदा और टांकरी से निकली है इसमें गुरुओं के मुख-वाक्य गुरमुखों ने लिखे, जिस कारण नाम ‘गुरमुखी’ प्रसिद्ध हुआ। पंजाब प्रदेश की शुद्ध भाषा

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