Tag Archives: कुरुक्षेत्र

दास्तान एक शहर की

ओमसिंह अशफाक  दास्तान- ए -शहर कैसे बयां करूं जीऊँ तो कैसे जीऊँ, मरूँ तो कैसे मरूँ मैं सन् 1984 में इस शहर में आया तो इसे आदतन शहर कहकर अपने कहे पर पुनर्विचार करना पड़ता था। बेशक जिला मुख्यालय तो यह 1973 में ही बन गया था, पर किसी भी कोण से शहर की शक्ल तब तक नहीं बन सकी

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हिंदी साहित्य अध्ययन-अध्यापनः चुनौतियां और सरोकार

प्रोफेसर सुभाष चंद्र, हिंदी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय,कुरुक्षेत्र  1922-25 के आस-पास बी.एच.यू. और इलाहाबाद में हिन्दी विभाग खुलने शुरू हुए थे। अभी  उच्च शिक्षा में एक विषय के तौर पर हिंदी साहित्य-अध्ययन के सौ साल भी नहीं हुए हैं, लेकिन हिंदी साहित्य के अध्ययन अध्यापन के भविष्य को लेकर चिंताएं प्रकट होने लगी हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ,बाबू श्याम सुंदर दास

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एस.के.कालरा – प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल और हरियाणा में सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों का सफर

संस्मरण प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल हरियाणा के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य को जानने-समझने में लगातार प्रयासरत तो रहे ही, वे ऐसे रास्ते भी तलाशते रहे जिन के माध्यम से एक स्वस्थ, प्रगतिशील समाज की संरचना सम्भव हो पाए। इसी के चलते सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं की स्थापना का बड़ा कार्य हुआ जिसमें वे प्रेरक तथा पथ प्रदर्शक के तौर पर सक्रिय रहे। ऐसी कई

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