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कुकुरमुत्ता – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

Post Views: 10 कविता एक थे नव्वाब,फ़ारस से मंगाए थे गुलाब।बड़ी बाड़ी में लगाएदेशी पौधे भी उगाएरखे माली, कई नौकरगजनवी का बाग मनहरलग रहा था।एक सपना जग रहा थासांस पर…