Tag: किसान आन्दोलन

हिमालय स्टेंड विद फार्मर – युथ फॉर हिमालय के प्रतिनिधिमंडल ने शंभु बार्डर पहुंच कर किया किसान आंदोलन 2.0 का समर्थन

Post Views: 29 चंडीगढ़ हिमालयी राज्यों के युवाओं के समुह युथ फॉर हिमालय के प्रतिनिधिमंडल ने शंभु बार्डर पर पहुंच कर किसान आंदोलन समर्थन किया और हिमालय स्टेंड विद फार्मर

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कानून की गैर कानूनियां – अपने ही किसानों पर ड्रोन से बंब बरसाती सरकार – अमनदीप सिंह

Post Views: 14 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युद्धों में मानव रहित विमान (UAV, unman aerial vehicle) का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।  2021 में उस समय भारतीय सेना के अध्यक्ष रहे

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किसानी चेतना की चार कविताएं- जयपाल

Post Views: 44 जयपाल अपनी कविताओं में हमारे समय के यथार्थ के विभिन्न पक्षों को बहुत विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करते हैं। सामाजिक-शक्तियों के बीच चल रहे संघर्षों का वर्णन

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वर्तमान किसान आंदोलन: एक नज़र- सुरेन्द्र पाल सिंह

हिंदू- मुस्लिम- सिक्ख ने अपनी अपनी नकारात्मक विरासतों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया है और यही है इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी। (लेख से ) … Continue readingवर्तमान किसान आंदोलन: एक नज़र- सुरेन्द्र पाल सिंह

प्रधानमंत्री जी से एक शिक्षक की हैसियत से विनती-अमरनाथ

( लेखक कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष हैं.) … Continue readingप्रधानमंत्री जी से एक शिक्षक की हैसियत से विनती-अमरनाथ

किसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं. … Continue readingकिसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

किसानी चेतना के हरियाणवी गीत और रागनियाँ – मंगत राम शास्त्री

मंगत राम शास्त्री- जिला जींद के ढ़ाटरथ गांव में सन् 1963 में जन्म। शास्त्री (शिक्षा शास्त्री), हिंदी तथा संस्कृत में स्नातकोत्तर। साक्षरता अभियान में सक्रिय हिस्सेदारी तथा समाज-सुधार के कार्यों में रुचि। ज्ञान विज्ञान आंदोलन में सक्रिय भूमिका। “अध्यापक समाज” पत्रिका का संपादन। कहानी, व्यंग्य, गीत, रागनी एंव गजल विधा में निरंतर लेखन तथा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। “अपणी बोली अपणी बात” नामक हरियाणवी रागनी-संग्रह प्रकाशित। … Continue readingकिसानी चेतना के हरियाणवी गीत और रागनियाँ – मंगत राम शास्त्री

सुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएँ

सुरजीत सिरड़ी हरियाणा राज्य के सिरसा जिले में रहते हैं तथा पेशे से एक शिक्षक हैं। सुरजीत मूलतः पंजाबी भाषा के कवि हैं। इनकी कविताओं में इतिहास के साथ संवाद के समानांतर वर्तमान राजनैतिक चेतना भी नजर आती है जो पाठक को एक पल के लिए ठहरकर सोचने को विवश करती है।
एक साहित्यकार का दायित्व है कि वो अपने आस पास घट रही घटनाओं पर पैनी नजर रखे; इन कविताओं में गम्भीर किसान विमर्श नजर आता है. प्रस्तुत है किसानी चेतना से लबालब उनकी तीन कविताएं- … Continue readingसुरजीत सिरड़ी की तीन कविताएँ