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किसान आंदोलन और लोकतंत्र – गोपाल प्रधान

Post Views: 26 आखिरकार देश के प्रधानमंत्री ने किसान आंदोलन के सवाल पर जो वैचारिक अभियान शुरू किया उससे ही बात शुरू करना उचित होगा । कारण कि देश के…

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मुग़लकालीन किसान आंदोलन – सूरजभान भारद्वाज

Post Views: 52 मुग़लकालीन किसान आंदोलन से संबंधित इतिहास के विद्वानों ने बहुत कम लिखा है। बहुत पहले इरफ़ान हबीब ने अपनी पुस्तक, Agrarian System of Mughul India 1963  प्रकाशित की थी।…

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किसान आंदोलन: लीक से हटकर एक विमर्श- सुरेन्द्र पाल सिंह

सुरेन्द्र पाल सिंह- जन्म – 12 नवंबर 1960 शिक्षा – स्नातक – कृषि विज्ञान स्नातकोतर – समाजशास्त्र सेवा, व्यावहारिक मनौवि‌ज्ञान, बुद्धिस्ट स्ट्डीज – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत लेखन – सम सामयिक मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित सलाहकर – देस हरियाणा कार्यक्षेत्र – विभिन्न संस्थाओं व संगठनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों विशेष तौर पर लैंगिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय, सांझी संस्कृति व साम्प्रदायिक सद्भाव के निर्माण में निरंतर सक्रिय, देश-विदेश में घुमक्कड़ी में विशेष रुचि-ऐतिहासिक स्थलों, घटनाओं के प्रति संवेदनशील व खोजपूर्ण दृष्टि। पताः डी एल एफ वैली, पंचकूला मो. 98728-90401

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कॉर्पोरेट कृषि में पूँजी निवेश और अपराधीकरण- विकास नारायण राय

नब्बे के दशक में आये उदारीकरण के दौर ने हरियाणा के ऐसे तमाम गावों में ‘बुग्गी ब्रिगेड’ के रूप में खेती से विमुख बेरोजगारों के आवारा झुण्ड पैदा कर दिए थे। पंजाब के गावों में भी इस दौरान उत्तरोत्तर नशे का चलन बढ़ता गया है। लेकिन मंडी और एमएसपी व्यवस्था ने कृषि और किसानी के जुड़ाव को जिंदा रखा हुआ था। कॉर्पोरेट कृषि व्यवस्था इसे जड़ों से अस्थिर करने वाली प्रणाली है। (लेख से)

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किसानों के तूफान के आगे नहीं टिकेगा कोई गुमान सरकार किसानों से बात करे और निकाले समाधान- अरुण कुमार कैहरबा

(लेखक हिंदी विषय के अध्यापक तथा देसहरियाणा पत्रिका के सह-सम्पादक हैं .)

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किसान आंदोलन के पर्यायवाची स्वामी सहजानन्द सरस्वती के किसानों के नाम दो संबोधन

स्वामी सहजानन्द सरस्वती (22-2- 1889-26-6-1950) भारत के राष्ट्रवादी नेता एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वे भारत में किसान आन्दोलन के जनक थे। वे आदि शंकराचार्य सम्प्रदाय के दसनामी संन्यासी अखाड़े के दण्डी संन्यासी थे। वे एक बुद्धिजीवी, लेखक, समाज-सुधारक, क्रान्तिकारी, इतिहासकार एवं किसान-नेता थे।मुख्य कृतियाँ- भूमिहार-ब्राह्मण परिचय, ब्रह्मर्षि वंश विस्तर, मेरा जीवन संघर्ष, जंग और राष्ट्रीय आजादी, किसानों के दावे, कर्मकलाप, क्रांति और संयुक्त मोर्चा, गीता हृदय इत्यादि।उन्होने ‘हुंकार’ नामक एक पत्र भी प्रकाशित किया।

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भारत में संकट पर – चौधरी छोटू राम

Post Views: 311 अनुवाद-हरि सिंह हार्टकोर्ट बटलर 1914-18 में रोहतक के उपायुक्त रहे। उस दौरान चौधरी छोटूराम एक प्रमुख वकील, जाट गजट उर्दू साप्ताहिक के सम्पादक एवं जिला कांग्रेस कमेटी…

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खूए हरकत या खूए सकून (रजोगुण  या तमोगुण) – चौधरी छोटू राम

Post Views: 554 चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह ऐ जमींदार! तेरी खातिर मैंने सारी दुनिया से जंग मोल ले रखी है। तेरे लिए ही जमाने भर को नाराज कर लिया…

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देवेन्द्र शर्मा  से अरुण नैथानी की बातचीत -कृषि संकट : आर्थिक कुप्रबंधन की देन

Post Views: 321 अरुण नैथानी – देश में खेती की निर्भरता का सच क्या है? जीडीपी में योगदान का वास्तविक आंकड़ा कितना है? देवेन्द्र शर्मा – सच ये है कि…