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सोनकेसी – पहाड़ी लोक-कथा

एक बार एक साहुकार था। उसके चार पुत्र थे ।चार में से बड़े तीन पुश्तैनी धन्धे के साथ अपना-अपना काम धन्धा  भी करते थे पर सबसे छोटा बेटा कोई काम-धाम नहीं करता था । उसकी इस आदत की वजह से साहुकार उससे नाराज रहने लगा । बोल-चाल भी बंद हो गई । बाकी के भाई भी उससे खिंचे-खिंचे से रहने

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