Tag: कहानी

होली – अमित मनोज

Post Views: 34 हाल ही में हरियाणा के देहात में जबरदस्त बदलाव हुए हैं। इन बदलावों के चलते परम्परागत त्यौहारों के प्रति भी एक विशेष किस्म की उदासीनता को महसूस

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सरफ़रोशी – गंगा राम राजी

Post Views: 61 नरेन्द्र देव जोशी लाहौर में एक जज के घर 15 मई 1892 में पैदा हुए। लाहौर उस समय क्रांतिकारियों का गढ़ था। लाला लाजपतराय, अजीत सिंह, और

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कोई दूसरा लोग – सुरेन्द्र पाल सिंह

Post Views: 130 सुरेन्द्र पाल सिंह हरियाणा की लोक–संस्कृति को पैनी इतिहास बोध भरी दृष्टि से देखते रहे हैं लेकिन इधर अब उनकी दिलचस्पी कविताओं के अनुवाद और कहानी लेखन

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राम-रहीम हथकरघा – सुशील स्वतंत्र

Post Views: 46 दिल्ली की झुग्गी बस्तियों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता से साप्ताहिक अखबार का संपादक और फिर लेखक बनें सुशील विभिन्न विधाओं में लेखन करते हैं। 1978

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कैप्टन और सांवली प्रिन्सेस – लेफ़्टिनेंट कर्नल भीम सेन त्यागी, अनुवाद – सुरेन्द्र पाल सिंह

(अंग्रेज़ी कहानी ‘Worse than That’ का हिंदी में अनुवाद: सुरेंद्र पाल सिंह) … Continue readingकैप्टन और सांवली प्रिन्सेस – लेफ़्टिनेंट कर्नल भीम सेन त्यागी, अनुवाद – सुरेन्द्र पाल सिंह

बड़े भाई साहब – प्रेमचंद

Post Views: 44 मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था;

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मक्रील – यशपाल

यूरोप और अमरीका ने जिसकी प्रतिभा का लोहा मान लिया, जो देश के इतने अभिमान की संपत्ति है, वही कवि मक्रील में कुछ दिन स्वास्थ्य सुधारने के लिए आ रहा है। … Continue readingमक्रील – यशपाल

एक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

पांच मिनट बीत गए पर कैदी ने कोई हरकत नहीं की। पंद्रह वर्ष के कारावास से उसे स्थिर बैठने का अभ्यास हो गया था। बैंकर ने अपनी उंगली से खिड़की पर दस्तक दी। जवाब में कैदी ने कोई हरकत नहीं की। फिर बैकर ने सावधानी से दरवाजे की सील तोड़ दी और ताले में चाबी घुमाई। जंग लगे ताले से एक कर्कश सी गुर्राने जैसी आवाज निकली। दरवाजा चरमरा उठा….(कहानी से) … Continue readingएक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

एक पाठक – मक्सिम गोर्की

“रुको नहीं, मेरे साथ तुम सही रास्ते पर हो” उसने कहा, “बात शुरू करो, तुम मुझे यह बताओ कि साहित्य का उद्देश्य क्या है ?” मेरा अचरज बढ़ता जा रहा था और आत्मसंतुलन घटना जा रहा था । आखिर यह आदमी मुझसे चाहता क्या है? और यह है कौन ? निस्संदेह वह एक दिलचस्प आदमी था, लेकिन मैं उससे खीज उठा था । (कहानी से) … Continue readingएक पाठक – मक्सिम गोर्की

आकशदीप- जयशंकर प्रसाद

‘आकाशदीप’ जयशंकर प्रसाद की बहुचर्चित कहानी है. यह कहानी ‘आकशदीप’ नामक कहानी संग्रह में संकलित है जिसका प्रकाशन सन् 1929 में हुआ था. कहानी की नायिका चम्पा को अपने पिता के हत्या के आरोपी बुधगुप्त से ही प्रेम हो जाता है. इस कहानी में प्रसाद जी ने कर्तव्य और प्रेम के मध्य अंतर्द्वन्द्व को चित्रित किया है. … Continue readingआकशदीप- जयशंकर प्रसाद