Tag Archives: कहानी

फासला

ज्ञान प्रकाश विवेक वालैंट्री रिटायरमेंट स्कीम किसी उपकार की तरह पेश की गई थी, जिसमें लफाज्जियों का तिलिस्म था और कारपोरेट  जगत का मुग्धकारी छल! इस छल का मुझे बाद में पता चला। फिलहाल तो मैं इस बाईस लाख के चैक को देखकर अभिभूत था, जो मुझे कम्पनी ने थमाया था। बाईस लाख! मैं तो उछल पड़ा था। मैं खुद

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किश्तियाँ

हरभगवान चावला ‘भूमिहीन खेतिहर मज़दूर के लिए कुँवारी, परित्यक्ता, विधवा कैसी भी वधू चाहिए। शादी एकदम सादी, शादी का सारा ख़र्च वर पक्ष की ओर से होगा। अगर ज़रूरत हुई तो वधू के माता-पिता को उचित मुआवज़ा भी दिया जाएगा।’ विवाह का ऐसा विज्ञापन किसी अख़बार में नहीं छपता पर पंजाब के मालवा क्षेत्र तथा साथ लगते हरियाणा के अधिकांश

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बिरादरी को गोली मारो

रोहतास कहानी                 सेठ त्रिलोकचंद बंसल टूथपेस्ट के झाग कम, थूक ज्यादा उगल रहा है।                 अंधेरा आकाश से समाप्त हो चुका है। सूर्य लाल हो रहा है, शहर के गगन से टकराती इमारतों से होड़ ले चुका है।                 टॉयलेट से बाहर निकलती बंसल की बेटी के पांवों में एकाएक ‘दैनिक जागरण’ समाचार आकर गिरा।                 आधी उत्सुकता से

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क्यों हो भरोसा भभूत का!

राजगोपाल सिंह वर्मा (पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करके राजगोपाल सिंह वर्मा ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में प्रकाशन, प्रचार और जनसंपर्क के क्षेत्र में जिम्मेदार वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। पांच वर्ष तक प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका “उत्तर प्रदेश” का स्वतंत्र सम्पादन किया। कविता, कहानी तथा ऐतिहासिक व अन्य विविध विषयों पर

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सावी

 सतीश सरदाना (लेखक सतीश सरदाना का जोधपुर पाखर, जिला भटिंडा पंजाब में जन्म हुआ।  एम बी ए फाइनेंस की शिक्षा प्राप्त की।  कविता,लघुकथा, कहानी व विचोरोत्तेजक लेख लिखते हैं।  वर्तमान में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में प्रबंधक हैं।  गुड़गांव में रहते हैं। ) जब से इस घर में आई है सावी, एक दिन सुख का साँस नहीं लिया। रतिया की

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रेलगाड़ी

सुरेश बरनवाल ज्यों ही रेलगाड़ी की सीटी की आवाज सुनाई दी, बूढ़ा जसवन्त मंजी से तेजी से उठा और लंगड़ाता सा घर के भीतर चला गया। भीतर जाते समय उसने एक बार कातर निगाहों से अपने पोते सुलतान की तरफ  देखा। सुलतान ने अपनी नजर नीची कर ली और सामने खड़े ग्राहक को सामान देने का बहाना करने लगा। जसवन्त

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भगवाना चौधरी

कुलबीर सिंह मलिक  नवम्बर का महीना। दोपहर का वक्त। सन् सैंतालीस का मुल्क के बंटवारे का दौर। जींद शहर से पांच सात किलोमीटर पर जींद-हांसी रोड पर एक गांव है। जिसका नाम है ईक्कस। बताते हैं कि महाभारत काल में महान योद्धा दुर्योधन महाबली भीम से छुपते-छुपाते यहां के तालाब में आ छुपा था। खैर, मेरी कहानी का महाभारत की

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वो रात को लाहौर चले गए

नरेश कुमार भरतो इस साल चौरासी पार कर जाएगी। 15 वर्ष की उम्र में शादी हो गई थी। साढ़े  सोलह की उम्र में पहली बेटी को जन्म दिया। अपने हल्के-फुल्के शरीर को लिए भरतो आस-पड़ोस की हमउम्र साथिनों का हाल-चाल पूछती रहती। अपनी चार साथिनों से भरतो उम्र में सबसे बड़ी दिखती है। उसकी याददाश्त पर उम्र की जरा भी

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नूरू की थाली

रामकिशन राठी  घोड़े दौड़ रहे थे…क्यड़पड़-क्यड़पड़, नगाड़े बज रहे थे…पडग़ड़ाम…पडग़ड़ाम-पडग़ड़ाम… लड़ाई के मैदान के नजारे को बयान करते हुए वह मुंह से ऐसी आवाजें निकालता था जो हूबहू घोड़े की टापों से मिलती-जुलती थी और नगाड़े पर डंके की चोट की आवाज भी मुंह से निकालता था, जैसे वास्तव में नगाड़ा ही बज रहा हो। फिर वह जोश भरे स्वर

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करवा का व्रत

यशपाल जन्म: 3 दिसम्बर, 1903 ई. फ़िरोजपुर छावनी, पंजाब, भारत मृत्यु: 26 दिसंबर, 1976 ई.   कन्हैयालाल अपने दफ्तर के हमजोलियों और मित्रों से दो तीन बरस बड़ा ही था, परन्तु ब्याह उसका उन लोगों के बाद हुआ। उसके बहुत अनुरोध करने पर भी साहब ने उसे ब्याह के लिए सप्ताह-भर से अधिक छुट्टी न दी थी। लौटा तो उसके अन्तरंग मित्रों ने भी उससे वही

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