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फूल और कांटे- अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Post Views: 5 हैं जनम लेते जगह में एक ही, एक ही पौधा उन्हें है पालता। रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही-सी चाँदनी है डालता। मेंह उनपर…

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हत्यारा- मुकेश मानस

Post Views: 9 हत्यारा आता है हत्या करता है और चला जाता है बेफ़्रिकी के साथ बड़ी शान से हत्यारा जाति नहीं पूछता धर्म नहीं पूछता पेशा नहीं पूछता हालात…

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सुनो विक्रम- सुशीला टाकभौरे

Post Views: 3 सुनो विक्रम कबसे लादे हो तुम कंधों पर कथाओं का बैताल। आदर्श, प्रेम, राजा, न्याय के अतिरिक्त बहुत क़िस्से हैं ज़रा अपनी नज़र से भी देखो निर्णय…

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ओ वाल्मीकि- सुशीला टाकभौरे

Post Views: 4 ओ वाल्मीकि! सभ्य सुसंस्कृत संबोधन को तुम क्यों पसंद नहीं करते तुम्हें ये शब्द झूठे और बेमानी क्यों लगते हैं? अगर तुम्हें कुछ देर अभिजात्य परिसर में…

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सफ़दर हाश्मी की याद में- मोहनदास नैमिशराय

Post Views: 4 एक दोस्तों तुम्हें इस वर्ष मैं केवल गमजदा संवेदनाएं ही दे सकूंगा क्योंकि इस बार नए वर्ष की दस्तक ने एक आदमी को हमसे छीन लिया है…

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लड़की ने डरना छोड़ दिया- श्योराज सिंह ‘बैचेन’

Post Views: 8 अक्षर के जादू ने— उस पर असर बड़ा बेजोड़ किया, चुप्पा रहना छोड़ दिया, लड़की ने डरना छोड़ दिया। हँसकर पाना सीख लिया, रोना-पछताना छोड़ दिया। बाप…