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कैदी और कोकिला – माखन लाल चतुर्वेदी

Post Views: 12 तुम रवि-किरणों से खेल, जगत को रोज़ जगाने वाली, कोकिल ! बोलो तो! क्यों अर्धरात्रि में विश्व जमाने आई हो ? मतवाली, कोकिल ! बोलो तो! दूबों…

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सुख-दुख- सुमित्रानंदन पंत

Post Views: 24 मैं नहीं चाहता चिर-सुख, चाहता नहीं अविरत दुख, सुख-दुख की आँख-मिचौनी खोले जीवन अपना मुख। सुख-दुख के मधुर मिलन से यह जीवन हो परिपूरन, फिर घन में…

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जागो फिर एक बार- सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

Post Views: 10 जागो फिर एक बार! प्यारे जगाते हुए हारे सब तारे तुम्हें अरुण-पंख तरुण-किरण खड़ी खोलती है द्वार जागो फिर एक बार! . आँखें अलियों-सी किस मधु की…

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बादल राग- सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला

Post Views: 6 तिरती है समीर-सागर पर अस्थिर सुख पर दुख की छाया जग के दग्ध हृदय पर निर्दय विप्लव की प्लावित माया यह तेरी रण-तरी भरी आकांक्षाओं से घन,…

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विधवा – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’

Post Views: 7 विधवा वह इष्टदेव के मन्दिर की पूजा–सी वह दीप-शिखा-सी शान्त, भाव में लीन, वह क्रूर-काल-ताण्डव की स्मृति-रेखा-सी वह टूटे तरु की छुटी लता-सी दीन दलित भारत की…

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बीती विभावरी – जयशंकर प्रसाद

Post Views: 8 बीती विभावरी जाग री। अम्बर-पनघट पर डुबो रही तारा-घट ऊषा नागरी। खग कुल कुल-कुल-सा बोल रहा, किसलय का अंचल डोल रहा। लो यह लतिका भी भर लाई…

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अरुण यह मधुमय देश हमारा – जयशंकर प्रसाद

Post Views: 5 अरुण यह मधुमय देश हमारा! जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा । सरस तामरस गर्भ विभा पर-नाच रही तरुशिखा मनोहर। छिटका जीवन हरियाली पर-मंगल कुंकम…

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आंसू- अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Post Views: 4 तुम पड़ो टूट लूटलेतों पर। क्यों सगों पर निढाल होते हो।। दो गला, आग के बगूलों को। आँसुमो गाल क्यों भिगोते हो। आँसुओं और को दिखा नीचा…