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सुरेश बरनवाल की कविताएं

सुरेश बरनवाल
प्रकाशित कृतिः संवेदनाओं संग संवाद- कहानी संग्रह 2010, कविता संग्रह- कतरा-कतरा आसमान 2015
कादम्बिनी, आजकल, देस हरियाणा, हरिगंधा, व अन्य पत्र-पत्रिकाओं में कहानी, लघुकथा, कविता, गजल, लेख, बालकविता। कथादेश, हंस, इतिहास बोध व अन्य पुस्तकों में स्वरचित चित्र प्रकाशित। विशेषः कहानी संग्रह काशी विद्यापीठ के पाठ्यक्रम में शामिल। कहानी सैनिक और बन्दूक को 2005 में भारत सरकार द्वारा आयोजित अखिल भारतीय युवा कहानीकार प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त। कहानी अस्थि विसर्जन को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कहानी प्रतियोगिता 2014 में तृतीय स्थान प्राप्त। विभिन्न कहानियों पर मंचन व रेडियो नाट्य प्रसारण। आकाशवाणी द्वारा कविता प्रसारण।

एस.एस.पंवार की पांच हरियाणवी-राजस्थानी कविताएं

एस.एस.पंवार
जन्म- 19 अप्रैल 1990
फतेहाबाद के पीली मंदोरी गांव में जन्म। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोतर। प्रिंट और टी.वी. पत्रकारिता में तीन साल काम करने के उपरांत फिलहाल हिसार के दयानंद पी जी कॉलेज में बतौर सहायक प्रोफेसर (जनसंचार) कार्यरत।
कथा-समय, आजकल, कथेसर, दोआबा एवं दस्तक सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं और लेख प्रकाशित। पहली कहानी ‘अधुरी कहानी’ नाम से साल 2013 में हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका ‘कथा समय’ में प्रकाशित व पहली कविता 2009 में हरियाणा साहित्य अकादमी की पत्रिका ‘दस्तक’ में प्रकाशित।

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अशोक भाटिया की कविताएं

अशोक भाटिया अम्बाला छावनी (पूर्व पंजाब) में जन्म। साहित्यकार एवं समीक्षक। हिन्दी में पी – एच.डी.। पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर। विभिन्न पत्र – पत्रिकाओं में लेखों, लघुकथाओं, कविताओं आदि का निरन्तर प्रकाशन। प्रकाशित पुस्तकों में आलोचना एवं शोध तथा कविताओं, लघुकथाओं के संग्रह और बाल – पुस्तकें। कई पुस्तकों का संपादन। बाल – पुस्तक समुद्र का संसार’ (1990) पर हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा श्रेष्ठ कृति सम्मान सहित अनेक पुरस्कार व सम्मान। लघुकथा पर विशेष कार्य।

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दयाल चंद जास्ट की कविताएं

Post Views: 655 (दयाल चंद जास्ट, रा.उ.वि.खेड़ा, करनाल में हिंदी के प्राध्यापक हैं। कविता लेखन व रागनी लेखन में निरंतर सक्रिय हैं) (1) मैं सूखे पत्ते सी उड़ रही हूं…

हरभगवान चावला की कविताएं

ये किया हमने
हमने स्त्रियों की पूजा की 
और लहूलुहान कर दिया
हमने नदियों की पूजा की 
और ज़हर घोल दिया 
हमने गायों की पूजा की 
और पेट में कचरा उड़ेल दिया
हमने ईश्वर की पूजा की 
उसके क़त्ल के लिए हमने 
नायाब तरीका चुना
हमने एक ईश्वर के 
कई ईश्वर बनाए 
और सब को आपस में लड़ा दिया ।