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कर्मचंद केसर

लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर

विश्व पर्यावरण दिवस पर लिखी गई कर्मचंद केसर की कविता – लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नै। … Continue readingलाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर