Tag: कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर

लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर

विश्व पर्यावरण दिवस पर लिखी गई कर्मचंद केसर की कविता – लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नै। … Continue readingलाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर

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क्यूं मेरा गुंट्ठा मांगै सै – कर्मचंद केसर

Post Views: 103 मैं सूं गरीब भील का बेटा, कर लिए कुछ ख्याल मेरा,क्यूं मेरा गुंट्ठा मांगै सै मनै, के करया नुकस्यान तेरा। धनुष विद्या की चाहना थी, मन मैं

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दो हरियाणवी ग़ज़लें- कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर हरियाणा राज्य के कैथल जिले में रहते हैं। केसर की गज़लें पाठक का हरियाणवी समाज से सीधा संबंध स्थापित कराती हैं। प्रस्तुत है उनकी दो गज़लें: … Continue readingदो हरियाणवी ग़ज़लें- कर्मचंद केसर

सृजन उत्सव में गूंजी सवाल उठाती कविताएँ

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन द्वारा 14-15 मार्च को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित हरियाणा सृजन उत्सव में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया। … Continue readingसृजन उत्सव में गूंजी सवाल उठाती कविताएँ

सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया -कर्मचंद केसर

Post Views: 192   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया। चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया। तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,

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जीन्दे जी का मेल जिन्दगी – कर्मचंद केसर

Post Views: 213 हरियाणवी ग़ज़ल जीन्दे जी का मेल जिन्दगी। च्यार दिनां का खेल जिन्दगी। फल लाग्गैं सैं खट्टे-मीठे, बिन पात्यां की बेल जिन्दगी। किसा अनूठा बल्या दीवा, बिन बात्ती

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हेल्ली-महल चबारे  देक्खे – कर्मचंद केसर

Post Views: 151 हरियाणवी गजल हेल्ली-महल चबारे  देक्खे। छान-झोंपड़ी ढारे देक्खे। तरसें सैं किते बूंद-बूंद नैं, चलते किते फुहारे देक्खे। गरमी-सरदी कदे मींह् बरसै, कुदरत तिरे नजारे देक्खे। होणी सै

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मेरे हालात नां पूच्छै – कर्मचंद केसर

Post Views: 888 हरियाणवी गजल मेरे हालात नां पूच्छै। इस दिल की बात नां पूच्छै। फुटपाथ पै बसर करूं सूं। मेरी औकात नां पूच्छैं। मैं सबका सब मेरे सैं, तौं

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यार छोड़ तकरार की बातां – कर्मचंद केसर

Post Views: 553  हरियाणवी गजल यार छोड़ तकरार की बातां। आजा कर ले प्यार की बातां। एक सुपना-सा बणकै रह्गी, आपस के इतबार की बातां। आजादी म्हं भी जस की

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