Tag: कबीर

गाँधीवादी आलोचक विश्वनाथप्रसाद तिवारी – अमर नाथ

“ महान साहित्य घृणा नहीं, करुणा पैदा करता है. घृणित चरित्र के प्रति भी एक गहरी करुणा. यदि साहित्य घृणा, हिंसा और असहिष्णुता पैदा करने लगे तो दुनिया बदरंग हो जाएगी. रचना हृदय परिवर्तन की एक अहिंसक प्रक्रिया है. वह हिंसा का विकल्प नहीं है.” … Continue readingगाँधीवादी आलोचक विश्वनाथप्रसाद तिवारी – अमर नाथ

युद्ध नहीं बुद्ध चाहिए : अमन दोस्ती यात्रा

Post Views: 288 गतिविधियां 13 अगस्त, 2018 को  दिल्ली से वाघा बार्डर तक चल रही अमन दोस्ती यात्रा का पीपली (कुरुक्षेत्र) स्थित पैराकीट में देस हरियाणा द्वारा जोरदार स्वागत किया

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कहां से आया कहां जाओगे -कबीर

Post Views: 826 साखी – अलख1 इलाही2 एक है, नाम धराया दोय। कहे कबीर दो नाम सुनी, भरम3 पड़ो मति कोय।।टेक कहां से आया कहां जाओगे, खबर करो अपने तन

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भक्ति करो ब्राह्मांड में – कबीर

Post Views: 769 साखी -गुरु लोभी शिष्य लालची, दोनों खैले दाव। दोनों बपुरे बूडही1, चढ़ी पत्थर की नाव।।टेक भक्ति करो ब्राह्मांड में साधु- ऐसी भक्ति करो मन मेरे, आठ पहर

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जग मैं भूला रे भाई – कबीर

Post Views: 606 साखी – हंसा तू तो सबल था, हलुकी1 अपनी चाल। रंग करंगे रंगिया, किया और लगवार2।टेक जग मैं भूला रे भाई, मेरे सतगुरु जुगत3 लखाई4। चरण –

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पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये -कबीर

Post Views: 633 साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि। औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये। चरण – एक जाइनि2 से चार

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न जाने तेरा साहेब कैसा है -कबीर

Post Views: 567 साखी – कांकर पाथर जोरि1 कै, मस्जिद लई बनाय। तां  चढ़ी मुल्ला बांग2 दे, बहरो भयो खुदाय।।टेक न जाने तेरा साहेब कैसा है। चरण – मस्जिद भीतर

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अमल करे सो पाई – कबीर

Post Views: 943 साखी – कहंता1 तो बहुत मिला, गहंता2 मिला न कोय। सो कहंता बहि जान दे, जो न गहंता होय।।टेक अमल करे सो पाई रे साधो भाई अमल

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म्हारो हीरो हेराणो कचरा में – कबीर

Post Views: 563 साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा। दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक – म्हारो हीरो हेराणो कचरा में, पांच पचीस

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