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ज्ञान-पश्चिम-औपनिवेशिकता

 अमनदीप वशिष्ठ भारत लगभग दो सौ साल तक अग्रेंजी साम्राज्य के अधीन रहा। साम्राज्यवाद ने भारत के प्राकृतिक-भौतिक संसाधनों का केवल दोहन ही नहीं किया, बल्कि सांस्कृतिक वर्चस्व कायम करके दिमागों और आत्मा को गुलाम बनाने की कोशिश की। ज्ञान-विज्ञान व विचारों की प्रकृति वैश्विक होती है, लेकिन साम्राज्यवाद ने शिक्षा, पाठ्यचर्या के माध्यम से उपनिवेशों के नागरिकों में हीनता

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