Tag Archives: उपभोक्तावाद

धर्म और कार्ल मार्क्स

जगदीश्वर चतुर्वेदी अनेक लोग हैं जो कार्ल मार्क्स के धर्म संबंधी विचारों को विकृत रूप में व्याख्यायित करते हैं। वे मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं को गलत देखते हैं फिर सभी मार्क्सवादियों पर हमला आंरंभ कर देते हैं। सवाल यह है क्या मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं से धर्म की कोई सही समझ बनती है ?क्या दुनिया में मार्क्सवादी धर्म

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प्रो. भीम सिंह दहिया- अँग्रेजी साहित्य शिक्षण में प्रो. ओम प्रकाश ग्रेवाल का योगदान

संस्मरण जाने-माने शिक्षाविद प्रोफेसर भीम सिंह दहिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। इस से पहले वे महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय , रोहतक में रजिस्ट्रार और इसी विश्वविद्यालय के अँग्रेजी विभाग में प्राध्यापक के तौर पर भी कार्यरत रहे। वे प्रो. ओ.पी.ग्रेवाल के नज़दीकी मित्रों में से एक हैं और साथी प्राध्यापक एवं शिक्षाविद के रूप

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हरियाणा में रागनी की परम्परा और जनवादी रागनी की शुरुआत

डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल हरियाणा में आम जनता तक पहुंचने के लिए रागनी एक कारगर माध्यम दिखाई देती है। क्योंकि पिछले पचास-साठ सालों के दौरान कुछ प्रमुख लोक-प्रतिभाओं ने इसके विकास में विशेष भूमिका निभाई है, इसलिए रागनी आज हरियाणा में लोक-साहित्य के किसी भी अन्य रूप की तुलना में अधिक जीवन्त और प्रचलित विधा बन गयी है। जब आम लोगों

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