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धर्म और कार्ल मार्क्स – जगदीश्वर चतुर्वेदी

अनेक लोग हैं जो कार्ल मार्क्स के धर्म संबंधी विचारों को विकृत रूप में व्याख्यायित करते हैं। वे मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं को गलत देखते हैं फिर सभी मार्क्सवादियों पर हमला आंरंभ कर देते हैं। सवाल यह है क्या मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं से धर्म की कोई सही समझ बनती है ?क्या दुनिया में मार्क्सवादी धर्म के बारे में एक ही तरह सोचते हैं ॽ

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अँग्रेजी साहित्य शिक्षण में ओम प्रकाश ग्रेवाल का योगदान – भीम सिंह दहिया

Post Views: 160 संस्मरण जाने-माने शिक्षाविद प्रोफेसर भीम सिंह दहिया कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर रहते हुए सेवानिवृत्त हुए। इस से पहले वे महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय , रोहतक…

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हरियाणा में रागनी की परम्परा और जनवादी रागनी की शुरुआत – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

रागनी की असली जान, ठेठ लोकभाषा के मुहावरों में सीधी-सादी लय अपनाने में और ऐसे मर्म-स्पर्शी कथा प्रसंगों के चुनाव में होती हैं ” जो लोगों के मन में रच-बस गये हों। इन सबके सहारे ही रागनी लोगों की भावनाओं को, उनकी पीड़ाओं तथा दबी हुई अभिलाषाओं को सुगम और सरल ढंग से प्रस्तुत करने में सफल होती हैं।